Monday, 26 December 2011

नया साल आ गया


नया साल आ गया

खामोश बैठा था,
दिल भी कही और गुमनाम था l
ऐसे में अचानक हाथों में आपका कलाम आ गया l
पढ़कर आँखे नम हो गए,
और उसी के सहारे गुजार रहा था दिन,
आशा था दिल को तू आयेगी,
पर तू आई न,
और इस साल का आखिरी शाम आ गया l
याद कर ही रहा था मैं, बीती बातों को,
तभी दरवाजे पर दस्तक हुआ,
और आपका पैगाम आ गया l
मुरझाये फुल खिल गए इस दिल दीवाने का,
झूम उठा मन ये सोचकर,
की आपका सलाम आ गया l
प्यार का धुन था ऐसा की,
एक ही पंक्ति को पढ़ने में खोया हुआ था मन,
और पता नहीं चला,
कब ?
उस शाम की रात ढल गई l
सूरज नई किरणों के साथ उदय हुआ,
और खुशियों से भरा नया साल आ गया l


(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक  बन सकती है, 
आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l )
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