Saturday, 12 December 2015

हमें एक Miss Call कर दो

"हमें एक Miss Call कर दो"

































कभी तन्हा अकेली हो अगर,
या गुजर न रही हो कोई लम्बी सफर ।
बेचैन सा मन हो या लेनी हो कोई खबर तो,
हमें एक Miss Call कर दो।
चाह कर भी कुछ सोच न सको,
याद भी कुछ न आये कभी ।
भूल जाना सब कुछ, बस हमारा नंबर याद कर लो,
याद आ ही गया जब हमारा नंबर,
तो फोन उठाओ और
हमें एक Miss Call कर दो ।
आवाज तेरी कितनी प्यारी है,
किसी से भी यु खीज कर बात न करो।
हर तकलीफ बाँट लूंगा,
हर गुस्सा तुम मुझ पर उतारो।
लेकिन बस
हमें एक Miss Call कर दो ।
प्यार में तो होती रहती है अकसर कुछ गलतियां,
हमसे भूल हो गई हो तो माफ़ करना ।
माफ़ कर ही दिया तो हमसे नाराजगी कैसी,
जब हमसे नाराज ही नहीं तो,
अब तो
हमें एक Miss Call कर दो ।
सिलवटें आ जाएँगी यूँ करवटें न बदलो बिस्तर में,
नींद न आ रही हो तो एक काम करो,
ओढ़ लो सर तक चादर और झट से
हमें एक Miss Call कर दो ।

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गोकुल कुमार पटेल


Tuesday, 3 November 2015

HINDI SMS


लघु संदेश सेवा SMS (Short Message Service)



1.दिल में बसने वालों की कोई सूरत नहीं होती ,
     और सांसों में जो बसते है उनकी कोई मूरत नहीं होती। 
     जो पढ़ लेते है आँखों से ही दिल ऐ बयां,
     उन्हें शब्दों से कुछ भी कहने की जरुरत नहीं होती।

2. मद मस्त आँखों से पिलाया है तुमने मेरे हाथों में अब कोई जाम न दें,
     झूम उठा है मन मेरा पर शराबी का मुझे कोई नाम न दें। 
     डूबे रहने दो तेरे प्यार में मुझे दूसरा कोई काम न दें।
     तेरा प्यार मिला है बड़ी मुद्दत के बाद चोरी का मुझको इल्जाम न दे।

3. वो अक्सर हमें याद करते है क्योकि वो अक्सर हमें भूल जाते है।
     और एक हम है जो उन्हें याद करते ही नहीं,
     क्योकि हम हमेशा उन्हें हमारी यादों के साथ पाते है।

4. दोस्ती की भी अजीब कहानी है,
     एस एम एस लिखो तो परेशानी है ।
     एस एम एस न लिखो तो परेशानी है,
     पर लगता है शायद ये ही दोस्ती की निशानी है।

5. याद हर पल करते है उन्हें पर मेरे बातों का उन्हें इतबार नहीं होता,
     इतबार होता तो उन्हें फ़्रेंडशिप डे का इंतजार नहीं होता ।
     कैसे यकीन दिलाऊँ तुझे मेरे दोस्ती का ऐ दोस्त,
     दोस्ती तो विश्वास है और विश्वास का कोई दिन या वार नहीं होता।

6. हम सच सच बोलकर उन्हें अपना मान गए,
     वो झूठ झूठ बोलकर मेरे दिल के सारे हाल जान गए। 
     फिर भी यकीन नहीं है तुम्हें हम पर,
     ऐ दोस्त आज हम तुम्हें भी पहचान गए।

7. डर लगता है कहीं बुरा न मान जाओ और कहीं बिगड़ न जाएँ बात,
     नहीं पता पाना चाहता हूँ क्या, तेरे मन का या तेरे तन का साथ।
     पर ऐसा लग रहा है एक बार ही सही पर,
     बहुत प्यार करू तुझे ले के मेरे हाथों में तेरा हाथ।

8. न प्यार में सॉरी कहते है न दोस्ती में,
     तो क्या आपने हमें अपना दुश्मन मान लिया। 
     हम तो अपना समझते है सबको,
     और एक मुस्कराहट से भूल जाते है सारी दुश्मनी,
     पर आपकी नजरों में हम क्या है आज हमने जान लिया।

9. सोच रहें होंगें क्यों बेवजह मैं ऐसा कर रहा हूँ। 
     पर सच तो ये है तुमसे प्यार न हो जाएँ इस बात से डर रहा हूँ।     

10.काश आवाज आपकी इतनी प्यारी न होती ।
      काश आपसे बात हमारी न होती ।।
      काश सपनों में ही देख लेते आपको ।
       तो आज तुमसे मिलने की इतनी बेकरारी न होती ।।

11.तुमसे क्या बात करूँ ,
      मेरा हाल तो मैं खुद ही नहीं जानता। 
      सुन लेता हूँ अकसर आवाज तेरी,
      क्योकि तुमसे बिना बात किये ये दिल नहीं मानता।।

12.पल-पल हम याद तुम्हें करते रहें,
      बेचैन होकर आहें भरते रहें।
      सपनों ने भी बना ली हमसे दूरियां,
      रात भर हम यूँ  ही करवटें बदलते रहें।

13. तेरी आवाज से शहद सी मिठास बरसते है। 
      शायद इसलिए हर कोई तुमसे दोस्ती के लिए तरसते है।

14.हमसे हुई है क्या खता,
      जो दे रही हो इतनी बड़ी सजा।
      गुस्सा छोड़ दे अब और न सता,
      मान जा और अब अपना नाम बता।

15. तुम कुछ खोकर बहुत कुछ पा सकते हो,
      मैं कुछ पा कर बहुत कुछ खो सकता हूँ। 
      बहुत सोचने के बाद पता चला ऐ दोस्त,
      की न तुम मेरे हो सकते हो, और न मैं तेरा हो सकता हूँ। 
      फिर क्यों इतना लगाव है इतना चाह है,
      जबकि दोनों की मंजिल अलग है दोनों की अलग राह है। 

16.तेरी दोस्ती का असर है या तेरे प्यार का असर है, 
      जो दिल इतना व्याकुल है इतना बेसबर है। 
      तुझमे मैं हूँ मुझमे तू है फिर भी एक अंतर है,
      क्योकि हम दोनों के मन में वहम का घर है। 
      तुम्हे कुछ होने का डर है।
      और मुझे कुछ खोने का डर है। 

17.मैं मजबूर हूँ या तेरी कोई मजबूरी,
      जो अब तक है हममें ये दुरी। 
      न जाने कब होगी हमारी ख्वाहिशें पूरी,
      इंतजार में कहीं रह न जाये हमारी हसरतें अधूरी।

18.न जाने क्यों दूर होते हुए पास आने लगे है,
      न जाने क्यों तुम पर अपना हक़ जताने लगे है। 
      ये दिल की आवाज है या है कोई भ्रम नहीं पता,
      पर न जाने क्यों अच्छा सा एक सपना सजाने लगे है। 

19. ऐ दोस्त तुमने मुझे नहीं जाना है,
      मेरी नियत अच्छी नहीं न जाने कैसे माना है। 
      काश तुम्हें एहसास होता मेरे जज्बातों का,
      तब पता चलता तुम्हें, मेरा इरादा तो रिश्तों के वादे निभाना है। 

20.तेरे साथ कुछ सपने सजाने का मन करता है,
      कुछ खोने का कुछ पाने का मन करता है। 
      मोल लगा नहीं सकता तेरे हुश्न का पर सच तो ये है,
      हर कीमत पर तेरे साथ कुछ पल बिताने का मन करता है।

21.अकसर खामोश रह कर ही सब कुछ सच कहती हो,
      पर हमने तेरे बातों को सच मान लिया।
      अब किस अधिकार से तुमसे बात करूँ,
      जबकि हकीकत क्या है मैंने जान लिया।  

22.अब मुझे और क्या बताना चाहते हो,
      तोड़ कर सारे रिश्ते कौन सा रिश्ता निभाना चाहते हो। 

23.आखिर कब तक करूँगा इंतज़ार। 
      बता दो तुमसे दोस्ती करूँ की प्यार। 

24. मैं तुम्हे प्यार करूँ इस पर न कोई जोर है,
      तुम मुझे प्यार करो इस पर न कोई जोर है। 
      पर नजरे मिला कर एक बार कह तो दो,
      की तेरे दिल में मैं नहीं कोई और है।

25.ये कैसा प्यार है ये कैसा चाह है,
      न मुझे तेरी ख़ुशी की चाह है। 
      न तुम्हें मेरी ख़ुशी की परवाह है,
      लगता है दोनों की मंजिल और दोनों की अलग राह है।

26.तुमने कितना समय लगा दिया मुझे आजमाने में
      हमने भी कितना समय गँवा दिया तुम्हे पाने में। 
      ठीक ही किया की तुमने शर्त लगा दी
      वरना कितना समय बीत जाता तुम्हे मनाने में।  
      तुमसे जीतने की कोशिश में ही सही,
      अब आसानी होगी मेरे लिए तुम्हे भुलाने में।

27.तुमने कितना समय लगा दिया मुझे आजमाने में,
      हमने भी कितना समय गँवा दिया तुम्हे पाने में।
      ठीक ही किया की तुमने भुला दिया था मुझे,
      और मैं भी भूल चला था तुम्हें न पा ने के बहाने में।

28.दूर होकर मेरे बिन कैसे रह जाती हो,
      जुदाई का दर्द कैसे सह जाती हो ।
      कितना चालक हो तुम जो चुप रह कर,
      दिल ए बया आँखों से कह जाती हो ।

29. तुमने मुझे भुला दिया पर अब भी मैं तुम्हे याद करता हूँ,
      तेरी सादगी पर अब भी मरता हूँ ।
      तुझे कैसे यकीन दिलाऊ ए दोस्त,
      दिलो जान से भी ज्यादा तुझसे अब भी मैं प्यार करता हूँ ।

30.अब तो हर पल तेरे कॉल का इंतजार है,
      हर पल तेरी आवाज़ सुनने को दिल बेक़रार है ।
      फिर कैसे भूल जाऊं तुझे,
      जब तुमने ही कहा था मुझे तुमसे प्यार है ।

31. कब तक दूरी बर्दाश्त करू कब तक दिल जुदाई का दर्द सहेगा ।
      मिलने की उम्मीद कम है तब भी मुझे हर पल तेरा इंतजार रहता है,
      मन करता है कह दू तुम्हे मेरे दिल की हसरत
      पर डर लगता है की तुम क्या कहोगी ये दुनिया क्या कहेगा ।

32.कभी कभी तेरा रूठना भी एक अदा बन जाती है ,
      अनजाने में ही सही सबसे अनोखी और सबसे जुदा बन जाती है।
      तुमसे मैं यु ही प्यार नहीं करता,
      मैंने सुना है इसी तरह तो मोहब्बत खुदा बन जाती है ।

33. हर बात मेरी तेरे दिल को लगती है क्या इतना अच्छा मेरा निशाना है,
      मुझसे बात न करने का या ये सिर्फ फ़ोन काटने का बहाना है ।
      मैंने तो यु ही शरारत क्या था अपना समझ कर,
      मुझे क्या पता था कि अब भी तू मेरा नहीं बेगाना है ।

34.तुम पर मुझे विश्वास है अपने आप पर विश्वास कैसे करूँ,
      अकसर निराशा से हुआ है सामने तो किसी को पाने की आस कैसे करूँ।
      हमने कर दिया है इसीलिए सब कुछ तक़दीर के हवाले,
      अब ऊपर वाले ने मेरी तक़दीर ही ऐसी बनाई है तो मैं क्या करूँ।

35.मेरा फ़ोन काट देती हो किसी और के फ़ोन आने पर
      टाल देती हो बात को अक्सर पूछे जाने पर
      मैं जानते हुए भी कुछ नहीं कहता तेरा आशिक जो ठहरा,
      सब कुछ भूल जाता हूँ सिर्फ तेरे एक मुस्कुराने पर

36.तेरी आवाज़ इतनी अच्छी है कि तेरी हर बात प्यारी लगती है
      तेरी अदा भी सारे जहाँ से न्यारी लगती है
      मैं क्या हूँ तेरी नज़र में तुम जानो
      पर मेरी नजर में तू तो जान हमारी लगती है 

37.अब तो दे दो मेरे हाथों में तेरा हाथ की प्यार का इकरार करूँ
      अब तो आ जाओ मेरे बाँहों मे तुझे जी भर कर प्यार करूँ

38.तेरे साथ कुछ सपने सजाने का मन करता है,
      कुछ खोने का कुछ पाने का मन करता है। 
      कभी हो नहीं सकता ये शायद,
      फिर भी तेरे साथ कुछ पल बिताने का मन करता है।

39.मैंने रख दिया अपना दिल तेरे हाथों में निकाल कर,
      और तुमने साबित कर दिया मेरा नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल कर ।
      की अब तक तू भूल नहीं पाई है मुझे,
      और अब तक तुमने भी रखा है अपना दिल संभाल कर।

 40. जवानी में अकसर सब ही प्यार के सुहाने गीत गाते है,
      जब दिल टूटता है तो अकसर अपने आपको तन्हा ही पाते है। 
      और भूलने की कोशिश में अकसर सदियाँ बीत जाते है,
      वो लैला बन जाती है तो प्यार के चक्कर में अकसर मजनू पिट जाते है। 

41.ठीक ही किया तुमने जो हमसे रिश्ता तोड़ लिया,
      ठीक ही किया तुमने जो हमसे मुँह मोड़ लिया। 
      वरना पता नहीं कब तेरे साथ रहने की कसमे खा लेता,
      ठीक ही किया तुमने जो हमें तनहा छोड़ दिया।

42.छोड़ दो दामन मेरा मैं कोई ख़ास नहीं,
      झूठ फरेब से है वास्ता मेरा मैं कोई विश्वास नहीं। 
      मुझे अपना बनाने की कोशिश न कर ऐ दोस्त,
     खुशबू बन महका जाऊंगा जीवन को पर मिलने कोई आस नहीं। 

43.न जाने आज क्यों है मेरा दिल इतना बेक़रार। 
     न जाने आज क्यों देख रहा हूँ मोबाइल को बार बार। 
     न जाने आज क्यों थम सा गया है समय।
     न जाने आज क्यों कर रहा हूँ मैं उनके कॉल का इंतजार। 

44.तुम्हे भूलने की कोशिश में हर वक्त तुम ही तुम याद आने लगे।
     मन को बहुत सम्भाला हमने पर कमबख्त आँखे आंसू बहने लगे।
     दोस्तों ने कई बार पूछा - क्या हुआ ?
    सच कह न पाये हम उनसे और हर वक्त उनसे नज़ारे चुराने लगे। 

45. तुम्हे भूलने की कोशिश में हर वक्त तुम याद आने लगे।
      हर पल तुम्हें पाने के ही सपने सजाने लगे।
      तुमसे जुदा होकर मैं तो कब का मर गया होता,
      वो तो तेरा प्यार था मुझे जिन्दा रखने के जो लिए मेरे दिल को धड़कने लगे।

46.तुम्हे भूलने की कोशिश में हर वक्त तुम ही तुम याद आये।
     अब तो आलम ये है कि तेरे सिवा एक पल भी रहा न जाये।
     अजीब सी बेचैनी है अजीब सा हाल है जो किसी को कहा न जाये।
     आकर अब तो गले लगा ले मुझे जुदाई का दर्द अब तो मुझसे सहा न जाये। 

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गोकुल कुमार पटेल

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Saturday, 10 October 2015

“दहशत भरी रातें”

“दहशत भरी रातें”















अफवाह नहीं, है ये सत्य कहानी,
२०१५ में अप्रैल मई का माह ।
घटनाएँ ऐसी जो सबके लवों पर,
ला देती है करुणा भरी आह।
दहशत भरी रातें, तरह तरह की बातें।
खौफनाक रातों में,
निकाल ली जाती है किडनी,
निकाल ली जाती है आँखें।
दहशतगर्दी बेखौफ घूमते है,
हर शख्स को एकांत में ढूंढते है ।
बच्चा, बुड्ढ़ा हो या जवान,
गायब है सबके अधरों से मुस्कान।
सबसे ज्यादा बच्चे घबराने लगे है।
चोर अब जो, बच्चे चुराने लगे है।
डाकुओं का राज है, डाकुओं का जगत है।
लगता है इस खुनी खेल में,
चिकित्सकों की मिली भगत है।
लाशें कभी सड़क, तो कभी झुरमुट में पड़े मिलते है,
उनके जीवन की कभी भरपाई नहीं होती।
पुलिस फाइल पर फाइल बनाती है,
उन पर कोई कारवाही नहीं होती।
यह गिरोह कौन चलाता है,
न जाने कौन इसका सरगना है।
पर एक बात तो तय है,
इस गिरोह में सबका हाथ खून से सना है।
नीयत इनकी पैसे कमाने में होती है,
छोटी छोटी नहीं, यह बड़े पैमाने में होती है।
कौन इसे रोकेगा कौन मानवता का रखवाला बनेगा।
कब चेतना जागेगी कौन हिम्मतवाला बनेगा।
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गोकुल कुमार पटेल

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Monday, 7 September 2015

विचार-मंथन

विचार-मंथन





















हिंदुत्व को जिसने अब तक नहीं जाना है
उन्होंने ही दूसरे धर्म को अपना माना है। 
वे ही भूल कर अपने सारे रस्मों रिवाज,
संस्कृति का अर्थ बताने चले है। 
अपनों से नाता तोड़कर, 
गैरों पर हक़ जताने चले है। 
वादों की जिनकों क़द्र नहीं,
देखों आज वे वादा निभाने चले है। 
निरीह पशुओं को काटकर,
न जाने कौन सा उत्सव मनाने चले हैं।
कर गद्दारी अपने ही धर्म से,
गद्दार आज वफ़ादारी का पाठ पढ़ाने चले है ।
जी करता है खूब गालियाँ दू उन्हें ।
खूब भला बुरा कहूँ उन्हें ।
पर क्या करूँ, मेरा धर्म मुझे याद आ जाता है। 
दूसरे धर्म की जो, बुराई करना नहीं सिखाता है।
फिर ये सोचकर चुप हो जाता हूँ,
की शायद उनका भी मन उदास होगा ।
जल रहें होंगें वे भी पश्चाताप की अग्नि में,
दिलों में उनके अब भी जिन्दा कोई एहसास होगा। 
शायद लोकलाज से, समाज से वे डरते होंगें।
नतमस्तक हो वे भी ईश्वर की चुपचाप पूजा करते होंगें। 
उन्हें अपने मन की बात बताने चलें है। 
दिल से आज उन्हें हम अपनाने चलें हैं।
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गोकुल कुमार पटेल


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Friday, 21 August 2015

शिष्टाचार के नियम - I

शिष्टाचार के नियम - I

हम सभी ही जानते है की मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर सदाचार और शालीनता को अपनाते हुए विकास करता है इसकी यह गुण ही मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग कर बुद्धिमता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाती है। मनुष्य इस गुण को देखकर और सुनकर अपनाता है और परस्पर आदान प्रदान से इसका विस्तार होता है लेकिन किन्ही कारणवश कुछ लोगों तक यह पहुँच नहीं पाता और वे शिष्टाचार के नियमों से अनभिज्ञ रहते है और अशिष्ट या असभय व्यवहार करने लगते है। लोगों के इसी दोष को दूर करने के आशय से कुछ सुझाव दिए जा रहें है जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपना सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास कर समाज में सम्मान व प्रतिष्ठा प्राप्त  कर सकता है। 

खानपान
1.   खाना खाने के पहले एक या दो गिलास पानी पी सकते है, बशर्तें खाना खाने और पानी पीने के बीच का अंतराल कम से कम आधा घंटा होना चाहिए।
2.    खाना खाने से पहले मुँह, हाथ व पैर अच्छी तरह से धो ले तत्पश्चात खाना खाएं।
3.    नाख़ून को भी हमेशा समयानुसार काटते रहना चाहियें व खाने के पहले भी नाख़ून को अच्छी तरह से धो लेना चाहियें।
4.    खाना खाने से पहले अपने इष्ट देव का स्मरण व प्रार्थना स्वरुप सम्बंधित मंत्र का जप अवश्य करें।    
5.    खाना कभी भी जल्दबाजी में न खाते हुए छोटी छोटी निवाला लेकर कम से कम तीस या पैंतीस बार चबाकर खाना खाना चाहियें।
6.    खाना खाते समय मुँह खोलकर जोर जोर से चबाने  की आवाज निकाले बिना शालीनता पूर्वक मुँह बंद कर के खाना चबाते हुए खाना चाहिए।
7.    खाना टी. वी. देखते हुए, पढ़ते हुए या बातचीत करते हुए न करके एकाग्रचित्त होकर खाना चाहिए।
8.    खाने में से अरुचि कर व अनिच्छित वस्तुएं जैसे - छिलके, बीज, पत्तें आदि को टेबल में न डाल कर थाली के किनारे ही रखना चाहिए या फिर अतिरिक्त पात्र का उपयोग करना चाहियें।
9.    जूठे हाथों से खाना नहीं निकालना चाहियें न ही दूसरे थाली या बर्तनों को छूना चाहियें और न ही जूठे हाथों से गिलास उठाकर पानी पीना चाहियें।
10. चावल और सब्जी को निकालने के लिए अलग-अलग चम्मच का उपयोग करें या फिर चावल निकालने के बाद चम्मच को अच्छी तरह साफ करें तब सब्जी निकालें। 
11. खाना खाने के कम से कम आधा घंटे के बाद पानी पीना चाहिए, जहाँ तक सम्भव हो खाना खाने के बीच में भी पानी नहीं पीना चाहियें।
12. खाना खाने के बाद हाथ व मुँह को अच्छी तरह से धोना चाहिए।
13. खाना पूर्ण करने के बाद ईश्वर के प्रति धन्यवाद् व्यक्त अवश्य करें।   
14. बाहर का खाना, डिब्बा बंद और जंक फूड जैसे खानों से बचना चाहियें।   
15. फल का सेवन खाना खाने के एक घंटे पहले या एक घंटा बाद में ही करना चाहियें।
16. स्वस्थ शरीर के लिए सुबह का नाश्ता भारी, दोपहर का खाना सामान्य व शाम का खाना हल्का, कम व सुपाच्य करना चाहियें।
17. रात का खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले कर लेना चाहियें।
18. खाना खाने के बाद कम से कम सौ मीटर तक धीरे-धीरे चहल-कदमी अवश्य करें।
19. खाना हमेशा गरम व ताजा खाना चाहियें ठंडी खाना खाने से बचना चाहियें।
20. फलों व सब्जियों को हमेशा धोकर ही खाना या उपयोग में लाना चाहियें।
21. फ्रिज में रखें खाद्य सामग्री को खाने से पहले कुछ देर के लिए बाहर निकाल कर रखें फिर खाएं व उपयोग में लाएं।
22. बाजार में बिकने वाले तरह तरह के ठंडी पेय पदार्थ को पीने के अपेक्षा जलजीरा, गन्ना रस व नींबू पानी पीना स्वास्थ्य के अधिक लाभदायक है।
23. नहाने के कुछ समय पश्चात खाना खा सकते है, लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी न नहाएं।
24. मसालेदार व तैलीय खाना खाने से हमेशा बचना चाहियें।
25. मौसमी फल व सब्जियों का सेवन अधिकाधिक मात्रा में अवश्य ही करना चाहियें।
26. पानी कभी भी खड़े होकर व गटागट  नहीं पीना चाहियें बल्कि बैठकर थोड़ा-थोड़ा करके चबाते हुए पानी पीना चाहियें।
27. खाना खाने का स्थान या मेज़ (टेबल) को साफ सुथरा रखना चाहिए, दूसरी पाली में खिलाने या खाने से पहले उस स्थान या मेज़ (टेबल) की सफाई अवश्य कर लें तत्पश्चात खाना खिलाएं या खाएं। 

      क्रमशः...............................      

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          गोकुल कुमार पटेल

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