Monday, 2 October 2017

गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता

गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता
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गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
कितना कुछ बदल गया, तब तुमने चुप्पी तोडी।
कितना कुछ बदल गया, तब तुमने साथ छोडी।
गोडसे तु पहले मन को समझाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।

अमृतसर के जलियावाले बाग में कितना नरसंहार हुआ।
निर्दोष, निहत्थो पर कितने बेदर्दी से प्रहार हुआ।
उन्होंने कुछ नहीं कहा, क्योंकि उनसे वे मिले हुए थे।
पर तु भी तो मौन था, क्या तेरे होंठ भी सिले हुए थे।
भारतीयों पर जुल्म होता रहा, आँखें बंद कर तु सोता रहा।
गोडसे तु पहले जाग गया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।

भगत, राजगुरू, सुखदेव ने आजादी का आगाज किया।
संसद में बम गिराकर, बहरो के लिए आवाज किया।
एक भी जान न गई और उनके मनसूबों को सब जान गए।
रगो में बहती देश भक्ति की धारा को सब पहचान गए ।
सबकी नजर गाँधी पर थी,पर वे मुँह अपना खोले नहीं।
रूक सकती थी फाँसी, फिर भी गाँधी कुछ बोले नहीं।
गोडसे तु उस दिन कुछ बोला होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु उस दिन गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।

केरल में हिन्दुओं को मारकर, मुस्लिम कर रहे थे गुनाह ।
और गाँधी दे रहे थे मुस्लिमों के हर अपराधों को पनाह।
स्वामी श्रद्धानन्द के हत्यारे अब्दुल रशीद को सबने कहा कसाई।
शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोबिन्द को उन्होंने पथभ्रष्ट कहा और अब्दुल रशीद को कहा भाई।
गोडसे तु उस दिन गाँधी को रिश्तों की अहमियत समझाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु उस दिन गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।

नेताजी सुभाष जीत कर हारे, वल्लभभाई भी जीत कर हारा।
पट्टाभि सीतारमय्या, जवाहरलाल नेहरु ने हारकर बाजी मारा।
मन्दिरों पर सरकारी व्यय के पारित प्रस्ताव को निरस्त करवाया।
और हठकर सरकारी खर्चो पर मस्जिदों का मरम्मत  करवाया।
ये सब अभिमान के कारण, कर रहे थे पक्षपात पर पक्षपात।
अनशन की धमकी देकर, मनवा रहे थे अपनी हर बात।
गोडसे तु उस दिन गाँधी को भाई चारे का मतलब समझाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु उस दिन गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।

भारत के विभाजन का गाँधी उत्तरदायी था।
हिन्दुओं की हत्याओं का गाँधी उत्तरदायी था।
अहिंसा, सत्याग्रह के आड में, गाँधी एक अत्याचारी था।
बापू महात्मा के खाल में छिपा, गाँधी एक दुराचारी था।
ब्रिटिश का दलाल था, जिसका तुम्हें मलाल था।
गोडसे तु उनको संत का अर्थ समझाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु उस दिन गोली चलाया होता तो अच्छा होता।
गोडसे तु पहले आया होता तो अच्छा होता।
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गोकुल कुमार पटेल


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Saturday, 2 September 2017

भगवान को भगवान ही रहने दो

भगवान को भगवान ही रहने दो
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जागो हिन्दू जागो अब तो संभल जाओ,
पाश्चात्य सभ्यता से न इतना बदल जाओ।
कृष्ण लला का गुणगान न कर पाओ तो चुप ही रहो।
पर जिसे हम पालनहार कहे, उसे न गुनहगार बताओ।
समझदारी से काम लो, किसी के बहकावे में न आओ।
भगवान को भगवान ही रहने दो, इन्हें न डाँन बनाओ।

भाद्रपद्र कृष्ण अष्टमी को कडी सुरक्षा और कडी पहरेदारी में,
बालक बन अवतरित हुए जेल की चारदीवारी में।
सातों द्वार खोल सबको अचंभित कर दिया त्रिपुरारि ने,
कैद से आजाद हो सबको सुचित किया कृष्ण मुरारी ने।
माँ-बाप के हेराफेरी का न उन पर दोष लगाओ।
समझदारी से काम लो, किसी के बहकावे में न आओ।
भगवान को भगवान ही रहने दो, इन्हें न डाँन बनाओ।

नंदगाँव के पास यमुना नदी में था कालिया नाग का वास।
जहरीले फुफकार से कर रहा था सभी जीव-जन्तु का विनाश।
कालिया को हराकर उसका घमंड चकनाचूर किया।
भेज नागराज को रमणद्वीप ब्रजवासियों का संकट दूर किया।
ऐसे पालनहारी मुरली मनोहर के चरणों में शीश झुकाओ।
समझदारी से काम लो, किसी के बहकावे में न आओ।
भगवान को भगवान ही रहने दो, इन्हें न डाँन बनाओ।

प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नामक दैत्य,
राजकुमारियों का अपहरण करना लगता था उसे औचित्य।
दैत्य का वध कर कृष्ण ने 16100 रानियों की बचाई लाज।
रानियों ने तब कहा हे माधव क्या हमें अपनायेगा ये समाज।
चरित्रहीन का कलंक राजकुमारियों की सर से मिटाई।
लाज बचाने के लिए सब राजकुमारियों संग ब्याह रचाई।
ऐसे किशन कन्हैया पर चरित्रहीन का न दाग लगाओ।
समझदारी से काम लो, किसी के बहकावे में न आओ।
भगवान को भगवान ही रहने दो, इन्हें न डाँन बनाओ।

बाप को कारागार में डालकर, कंस मथुरा का राजा था बना ।
भगवान की पूजा, उपासना, यज्ञ करने को कर दिया था मना।
खड्ग, कृपाण का जोर दिखाकर अपनी बात मनवाता था।
खुद को भगवान बतलाकर, अपनी पूजा करवाता था।
धर्म का नाश कर रहा था ताकत के मद में चुर अहंकारी।
कुकर्मी के कुकर्म से पाप का पलडा हो गया था भारी।
अत्याचारी मामा का अंत कर कृष्ण ने अपना फर्ज निभाया।
रिश्ते-नातो से धर्म बडा है दुनिया को सिखलाया।
ऐसे गिरधारी बनबारी पर हत्यारे का न तौहमत लगाओ।
समझदारी से काम लो, किसी के बहकावे में न आओ।
भगवान को भगवान ही रहने दो, इन्हें न डाँन बनाओ।

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गोकुल कुमार पटेल


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Thursday, 3 August 2017

दो जून की रोटी

दो जून की रोटी
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आज फिर निकल पडा़ हूँ मैं, अपनी शक्ति आजमाने को,
दुनिया को मेरे होने का एहसास दिलाने को,
अपना और अपने परिवार का अस्तित्व बचाने को।
आज फिर निकल पड़ा हूँ मैं, दो जून की रोटियां कमाने को।

छोड़ कर घर-परिवार, छोड़ कर सारे रिश्ते नातों को,
छोड़ कर बीबी के अधर पर अटकी, अनकही बातों को।
छोड़ कर बच्चों की मुस्कान, लडकपन औऱ शरारतों को,
छोड़कर सुख-दुख से जुडी पल, पल से बनी दिन, रातों को।
आज फिर निकल पड़ा हूँ मैं, दो जून की रोटियां कमाने को।

उसी जज्बे, उसी हौसले से अपनी हुनर दिखाने को,
छलकती माथे की बूंदो से, अपनी किस्मत बनाने को।
तृप्ति की चाह में, अतृप्ति पेट की आग बुझाने को,
आज फिर निकल पड़ा हूँ मैं, दो जून की रोटियां कमाने को।

चीरकर धरती का सीना, उपजाऊ बनाने को,
खोदकर पर्वत, पहाड़ अमृत धारा बहाने को।
नन्ही-नन्ही बीजों से, लहलहाती फसल उगाने को,
आज फिर निकल पड़ा हूँ मैं, दो जून की रोटियां कमाने को।

नम मिट्टी को, पत्थर सा सख्त ईट बनाने को,
ईट से दीवार, दीवार से घर बनाने को।
सपनों के रंगों से, हर दरो दीवार सजाने को,
आज फिर निकल पड़ा हूँ मैं, दो जून की रोटियां कमाने को।

रेशम से धागा, धागे से कपड़ा बनाने को,
तन के संग-संग मन के विचारों को छिपाने को।
घूंघट ओढा़कर, सुंदर मूखडे पर चार चाँद लगाने को,
आज फिर निकल पड़ा हूँ मैं, दो जून की रोटियां कमाने को।
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गोकुल कुमार पटेल

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Thursday, 6 July 2017

मेरा गांव बदल गया

मेरा गांव बदल गया
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कल कारखानों के निर्माण से, पीपल का छाँव बदल गया।
सचमुच समाज के नव निर्माण में, मेरा गांव बदल गया।।

वृक्षों के कटने से, चिडियों के बसेरे बदल गये।
चिडियों की चहचहाट भरी वो सबेरे बदल गये।।

ताजगी भरी सुबह की ताजी-ताजी हवा बदल गयी।
ममत्व और दुलार से पुकारती माँ की तवा बदल गयीं।।

सडक के निर्माण से गली बदल गयीं रास्ते बदल गये ।
पैकेटबंद खानो से सुबह के पौष्टिक नाश्ते बदल गये।।

नल के लगने से सत्कार करती पनीहारन की कुआं बदल गयी।
चिमनियों के लग जाने से आकाश की धुआं बदल गयी।।

ईट पत्थरों के जुडने से घर और मकान बदल गये।
दिखावेपन में भईया और काका के पहचान बदल गये।।

लहलहाती फसलों के सारे खेत खलिहान बदल गये।
पैसो के खनक से सारे रिश्तों के ईमान बदल गये।।

वो तालाब बदल गयीं, वो नदी नाले बदल गये।
रक्षक बन अडिग रहने वाले हिम्मत वाले बदल गये।।

मन को हर्षाति बागों के सारे फुल और बेल बदल गये।
उछल कूद करने वाले बचपन के सारे खेल बदल गये।।

कुंठित बुद्धि से हमारे सारे सांस्कृतिक त्योहार बदल गये।
अपनत्व से गले लगाने वाले दोस्त, यार बदल गये।।

मन को शांति देने वाले राम कृष्णा के भजन बदल गये।
आधुनिकता से वास्तव में सारे धरती, गगन बदल गये।।

भ्रष्टता में सनकर जीवन के पासो का हर दाँव बदल गया।
गोकुल कहे नवनिर्माणों से सच में मेरा गांव बदल गया।
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गोकुल कुमार पटेल


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Monday, 19 June 2017

अधूरी आस













अधूरी आस
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तेरी खूबसुरती ही नहीं,
तेरी हर अदा ही मुझे प्यारी लगती है।
तेरे हुश्न की तारीफ मैं क्या करूँ,
तु मुझे चाँद से भी न्यारी लगती है।।
अब भी हर पल,
तेरे आने का इंतज़ार रहता है।
अब भी तुमसे,
बात करने को दिल बेकरार रहता है।।
ये जानते हुए कि,
ये सब अब सिर्फ खयाली बातें है ।
सच्चाई है तो बस इतना कि,
इस जीवन में अब, चंद ही मुलाकातें है।
अब न तु मुझे मिलेगी, अब न मैं तुम्हें मिलूँगा।
बिन धडकन के ये साँस चलेंगी,
अब बिन साँसो के ये जीवन जी लूंगा।
सब कुछ बदल चूका है, मौसम की करवटों से,
अधरो पर फिर भी कोई बात रुकी है।
जबकि मैं किसी और का हो चुका हूँ,
तु किसी और की हो चुकी हैं।
फिर ये तडप क्यों है, ये प्यार क्यों हैं।
तेरे आने का अब भी इंतज़ार क्यों है।
कैसे समझाऊँ इस दिल को,
ये मानता ही नहीं।
कहता हैं तु कभी पराई हो नहीं सकती,
तु तो अब भी जान हमारी लगती हैं।

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गोकुल कुमार पटेल

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Friday, 16 June 2017

एक अबोध बच्चा



एक अबोध बच्चा
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एक अबोध बच्चा, मन का कच्चा।
कैसे सीख लेता है,  खाना, पीना, सोना।
लोग कहते है प्रकृति है,
मुझे लगता है तृप्ति है।
प्यास और भूख का, शरीर के सुख का।

एक अबोध बच्चा, मन का कच्चा।
कैसे सीख लेता है, रोना, धोना, हंसना।
लोग कहते है प्रकृति है,
मुझे लगता है वृत्ति है।
मन के व्याकुलता का, हृदय के अनुकूलता का।

एक अबोध बच्चा, मन का कच्चा।
कैसे सीख लेता है, उठना, बैठना, चलना।
लोग कहते है प्रकृति है,
मुझे लगता है प्रवृत्ति है।
मनुष्य समाज का, समाज के विकास का।

एक अबोध बच्चा, मन का कच्चा।
कैसे सीख लेता है, खेलना, कूदना, दौडना।
लोग कहते है प्रकृति है,
मुझे लगता है वृद्धि है।
दिल के उमंग का, शरीर के हर अंग का।

एक अबोध बच्चा, मन का कच्चा।
कैसे सीख लेता है, तोडना, फोडना, जोडना।
लोग कहते है प्रकृति है,
मुझे लगता है कृति  है।
व्याग्रता, द्वेष, क्रोध का, विकारों के विरोध का।

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गोकुल कुमार पटेल


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Wednesday, 22 March 2017

वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।
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खेलने के लिए सुबह से ही जो बुलाया करते थे,
नाम को छोडकर जो कई उपनामों से चिढाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

मिल कर एक साथ जो स्कूल जाया करते थे,
बैठ कर एक साथ, बाँटकर जो खाना खाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

टेढी मेढी लकीरों से मेरा चित्र जो बनाया करते थे,
छिपाकर पेन,पेंसिल, पुस्तक जो मुझे सताया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

छिपकर किसी के भी पीछे जो मुझे डराया करते थे,
डरने पर रात में घर तक जो छोडने आया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

कंधों पर उठाकर जो पेडों पर चढा़या करते थे,
टहनियों पर बिठा कर जो झुला झुलाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

हाथ पकड़ कर जो कीचड़ पर चलाया करते थे,
गुलाल बनाकर जो धुल उडाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

छोटी-छोटी बातों से नाराज़ हो जाया करते थे,
और एक मुस्कान से जो मान भी जाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

नाराज हो जाता था और मैं जब कभी,
मिलकर सब मुझे मनाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

मेरी सही गलत आदतों को जो बताया करते थे,
कभी-कभी मेरी गलतियों को भी जो छिपाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

मम्मी पापा के डाँट से जो मुझे बचाया करते थे,
दुख में गले लगा कर जो अपनापन जताया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

उल्टी-पुल्टी चुटकुले जो सुनाया करते थे,
अजीब-अजीब हरकतों से जो हँसाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

चुपके से दबे पाँव जो पीछे से आ जाया करते थे,
जिनके याद में रह रहकर अब भी पीछे पलट जाया करता हूँ,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

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गोकुल कुमार पटेल


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Tuesday, 14 March 2017

होली मनाओ सब मिल जुल

"होली मनाओ सब मिल जुल"
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होली के पावन पर्व पर मेरी भी लाईने है चंद,
लाईनों में आपके लिए, मेरी शुभकामनाएं है बंद।
बंद है पैकेटों में जैसे अबीर गुलाल और रंग,
रंग में मिला कर भेज रहा हूँ प्यार का सुगंध।
सुगंध जब फैलेगी हवा के साथ उड-उड बहार में,
बहार झूम उठेगा होली के इस रंग-बिरंगी त्यौहार में।
त्यौहार से खुशियां ही खुशियां आए आपके परिवार में।
परिवार ढेर सारा पकवान, गुजिया और मिठाई बनाए,
पकवान, गुजिया और मिठाई खाएं, खाकर जश्न मनाएं ।
जश्न मनाएं रंग लगाए, रंग लगाए नीला, पीला, लाल,
पीला, लाल हो जाएं औऱ साथ में रखे प्रकृति का ख्याल।
प्रकृति का हमेशा ख्याल रखो, न जाना भुल, कहे गोकुल,
खूब धूम मचाओ, रंग जमाओ, होली मनाओ सब मिल जुल।

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गोकुल कुमार पटेल

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Friday, 3 March 2017

बढती दूरियों का राज

बढती दूरियों का राज
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रोज़ याद न कर पाऊँ तो,
ये मत समझना कि,
मैं आप लोगों को भुल गया।

रोज़ कुछ लिख न पाऊँ तो,
ये मत समझना कि,
मैं आप लोगों को भुल गया।।

मुझे हर रिश्ते, हर नाते याद है
हर दोस्त और,
दोस्तों की हर लफ्ज, हर बातें याद है ।

बस कभी-कभी इस जिंदगी का,
अकेलापन मुझे खामोश कर जाती है।

बस कभी-कभी इस जिंदगी की,
परेशानियों से खामोश हो जाता हूँ ।

तब बेबसी मुझे तन्हा कर जाती है,
और खुद को सुलझाने की कोशिश में,
खुद ही उलझन बन जाता हूँ।

तब न चाह कर भी मजबूर हो जाता हूँ,
छोड़ कर सबसे अलग रहने को,
तब लाचारी में सबसे अपरिचित
औऱ अनजान बन जाता हूँ।

और तभी तो सोचता हूँ अक्सर,
क्या खोया हूँ, क्या पाया हूँ इस ज़माने में।

बस मेरी जिंदगी तो गुजर रही है सिर्फ,
दो वक़्त की रोटियां कमाने में।
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गोकुल कुमार पटेल

Monday, 16 January 2017

मम्मी मुझे स्कूल जाना है

"मम्मी मुझे स्कूल जाना है"












मम्मी सुबह जल्दी जगा देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी सुबह जल्दी नहला देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी कपड़ा पहना देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी रोटी जल्दी बना देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी पुस्तक पेन दिला देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी अक्षर दिया टीचर ने,
मम्मी शब्द लिखना सीखा देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी ज्ञान बँट रहा स्कूल में
मम्मी शिक्षा का दीप जला देना,
मुझे स्कूल जाना है।
मम्मी होमवर्क मिलता है स्कूल से,
मम्मी होमवर्क हल करा देना,
मुझे स्कूल जाना है।
पाठ पुरा तब अपना करूंगा,
पुरा तब आपका हर सपना करुंगा।
मम्मी सुबह जल्दी जगा देना,
मुझे स्कूल जाना है।
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गोकुल कुमार पटेल

Wednesday, 23 March 2016

होली कैसे मनाएँ

होली कैसे मनाएँ

जैसा की हम सभी जानते है प्राचीन काल में अत्याचारी राक्षस राज हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे। प्रहलाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रहलाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई। होलिका को आग से नहीं जलने का वरदान था। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका बालक प्रहलाद को गोद में उठा जलाकर मारने के उद्देश्य से आग में जा बैठी। पर प्रभु की कृपा से प्रहलाद को मारने के प्रयास में होलिका की मृत्यु हो गई। तभी से होली का त्यौहार मनाया जाने लगा। उस समय पूर्ण चन्द्रमा की पूजा करने की भी परंपरा थी। वैदिक काल में इस पर्व को नवात्रैष्टि यज्ञ कहा जाता था। खेत के अधपके अन्न को यज्ञ में दान करके प्रसाद लेने का विधान समाज में व्याप्त था। यह महिलाओं  व पुरुषों द्वारा सामान रूप से परिवार की सुख समृद्धि के लिए मनाया जाता है और होली के दिन से आठ दिन पूर्व से ही होली की पूजा झंडा या डंडा गाड़कर किया जाता है। जिसके चारों तरफ होलिका की लकड़ी इकट्ठी की जाती है।


होलिका पूजन:- होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा की जाती है पूजा पूर्व या उतर दिशा की ओर मुख करके की जाती है । जिसमें एक लोटा जल, सिंदूर, चावल, पुष्प, सफ़ेद या पीले रंग से रंगा कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मिठाई व बताशे, गुलाल, कच्चे आम, नारियल, सात प्रकार के धान्य ( गेहूँ, उडद, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि सामग्री की आवश्यकता होती है। सबसे पहले होलिका के चारों ओर कच्चे सूत को  तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है। एक-एक करके सभी सामग्री होलिका को समर्पित कर पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन किया जाता है।  तत्पश्चात पूजन के बाद जल से अर्ध्य दिया जाता है। इस दिन होली में भरभोलिए (गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। नजर उतारने के लिए इस माला को  सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर होली में डाला जाता है।) होलिका पूजन के समय इस मंत्र का उच्चारण यथा शक्ति ग्यारह बार, इक्कीस बार, एक माला, तीन माला या  विषम संख्या के रुप में करना चाहिए :- 

'अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्’

पूजन के पश्चात् सभी सिंदूर का टीका लगाते है और घर के बुजुर्गों का चरण छूकर मंगलमय जीवन का आशीर्वाद लिया जाता है।


होलिका दहन: - होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों का अंत व अच्छाइयों का विजय का प्रतीक है। दिन ढलने पर ज्योतिषियों द्वारा निकाले मुहूर्त पर होली का दहन होली के गीत गाते हुए किया जाता हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार होली की बची हुई अग्नि और राख को अगले दिन सुबह घर में लाने व राख का लेपन शरीर पर करने से शरीर के समस्त प्रकार के व्याधि और घर के सभी दुखोः व अशुभ शक्तियों का नाश होता है। राख का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है:-   

‘वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च अतस्त्वं पाहि माँ देवी भूति भूतिप्रदा भव’



होली रंगोत्सव व मिलन समारोह:- होली का अगला दिन रंगोत्सव व धूलिवंदन कहलाता है। इस दिन सुबह होते ही सब अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने निकल पड़ते हैं ईर्ष्या-द्वेष की भावना भुलाकर प्रेमपूर्वक गले मिलते हुए गुलाल व रंग लगाकर मिठाई व पकवान बांटा जाता है।




Saturday, 30 January 2016

फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है

फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है















मंजिल के तलाश में, झूटी शान के आस में,
देखकर चकाचौंध को पास में।
खींचे चले आते है लोग मिथ्याभास में।       
जैसे वहां कोई देवालय है।
सच मानिये फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है।  
जहाँ कला कब की मर चुकी है
जहाँ अब मन से न कोई कलाकार होता है 
जहाँ सच तो बस ये है,
जहाँ कला के नाम पर सिर्फ व्यापार होता है
जहाँ फूहड़ता परोसती गानों में,
न सुर है, न ताल है और न ही लय है। 
फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है
जहाँ रंगीलो की रंगीन रात होती है। 
जहाँ जगमगाते सतहों पर नंगी नाच होती है। 
जहाँ सिसकियों में रात गुजारे जाते है। 
जहाँ मुखौटा पहनकर नथ उतारे जाते है। 
वेश्यावृत्ति का वो विद्यालय है
फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है। 
जहाँ सास, बहु और ननंद को लड़ाया जाता है। 
जहाँ बेटी के बाप को ही गुंडा बताया जाता है। 
जहाँ रिश्तों का मजाक बनाया जाता है। 
जहाँ धर्म के नाम से लोगों को बहकाया जाता है। 
धर्मांधों का वो आलय है। 
फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है।  

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गोकुल कुमार पटेल

Saturday, 12 December 2015

हमें एक Miss Call कर दो

"हमें एक Miss Call कर दो"

































कभी तन्हा अकेली हो अगर,
या गुजर न रही हो कोई लम्बी सफर ।
बेचैन सा मन हो या लेनी हो कोई खबर तो,
हमें एक Miss Call कर दो।
चाह कर भी कुछ सोच न सको,
याद भी कुछ न आये कभी ।
भूल जाना सब कुछ, बस हमारा नंबर याद कर लो,
याद आ ही गया जब हमारा नंबर,
तो फोन उठाओ और
हमें एक Miss Call कर दो ।
आवाज तेरी कितनी प्यारी है,
किसी से भी यु खीज कर बात न करो।
हर तकलीफ बाँट लूंगा,
हर गुस्सा तुम मुझ पर उतारो।
लेकिन बस
हमें एक Miss Call कर दो ।
प्यार में तो होती रहती है अकसर कुछ गलतियां,
हमसे भूल हो गई हो तो माफ़ करना ।
माफ़ कर ही दिया तो हमसे नाराजगी कैसी,
जब हमसे नाराज ही नहीं तो,
अब तो
हमें एक Miss Call कर दो ।
सिलवटें आ जाएँगी यूँ करवटें न बदलो बिस्तर में,
नींद न आ रही हो तो एक काम करो,
ओढ़ लो सर तक चादर और झट से
हमें एक Miss Call कर दो ।

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गोकुल कुमार पटेल


Tuesday, 3 November 2015

HINDI SMS


लघु संदेश सेवा SMS (Short Message Service)



1.दिल में बसने वालों की कोई सूरत नहीं होती ,
     और सांसों में जो बसते है उनकी कोई मूरत नहीं होती। 
     जो पढ़ लेते है आँखों से ही दिल ऐ बयां,
     उन्हें शब्दों से कुछ भी कहने की जरुरत नहीं होती।

2. मद मस्त आँखों से पिलाया है तुमने मेरे हाथों में अब कोई जाम न दें,
     झूम उठा है मन मेरा पर शराबी का मुझे कोई नाम न दें। 
     डूबे रहने दो तेरे प्यार में मुझे दूसरा कोई काम न दें।
     तेरा प्यार मिला है बड़ी मुद्दत के बाद चोरी का मुझको इल्जाम न दे।

3. वो अक्सर हमें याद करते है क्योकि वो अक्सर हमें भूल जाते है।
     और एक हम है जो उन्हें याद करते ही नहीं,
     क्योकि हम हमेशा उन्हें हमारी यादों के साथ पाते है।

4. दोस्ती की भी अजीब कहानी है,
     एस एम एस लिखो तो परेशानी है ।
     एस एम एस न लिखो तो परेशानी है,
     पर लगता है शायद ये ही दोस्ती की निशानी है।

5. याद हर पल करते है उन्हें पर मेरे बातों का उन्हें इतबार नहीं होता,
     इतबार होता तो उन्हें फ़्रेंडशिप डे का इंतजार नहीं होता ।
     कैसे यकीन दिलाऊँ तुझे मेरे दोस्ती का ऐ दोस्त,
     दोस्ती तो विश्वास है और विश्वास का कोई दिन या वार नहीं होता।

6. हम सच सच बोलकर उन्हें अपना मान गए,
     वो झूठ झूठ बोलकर मेरे दिल के सारे हाल जान गए। 
     फिर भी यकीन नहीं है तुम्हें हम पर,
     ऐ दोस्त आज हम तुम्हें भी पहचान गए।

7. डर लगता है कहीं बुरा न मान जाओ और कहीं बिगड़ न जाएँ बात,
     नहीं पता पाना चाहता हूँ क्या, तेरे मन का या तेरे तन का साथ।
     पर ऐसा लग रहा है एक बार ही सही पर,
     बहुत प्यार करू तुझे ले के मेरे हाथों में तेरा हाथ।

8. न प्यार में सॉरी कहते है न दोस्ती में,
     तो क्या आपने हमें अपना दुश्मन मान लिया। 
     हम तो अपना समझते है सबको,
     और एक मुस्कराहट से भूल जाते है सारी दुश्मनी,
     पर आपकी नजरों में हम क्या है आज हमने जान लिया।

9. सोच रहें होंगें क्यों बेवजह मैं ऐसा कर रहा हूँ। 
     पर सच तो ये है तुमसे प्यार न हो जाएँ इस बात से डर रहा हूँ।     

10.काश आवाज आपकी इतनी प्यारी न होती ।
      काश आपसे बात हमारी न होती ।।
      काश सपनों में ही देख लेते आपको ।
       तो आज तुमसे मिलने की इतनी बेकरारी न होती ।।

11.तुमसे क्या बात करूँ ,
      मेरा हाल तो मैं खुद ही नहीं जानता। 
      सुन लेता हूँ अकसर आवाज तेरी,
      क्योकि तुमसे बिना बात किये ये दिल नहीं मानता।।

12.पल-पल हम याद तुम्हें करते रहें,
      बेचैन होकर आहें भरते रहें।
      सपनों ने भी बना ली हमसे दूरियां,
      रात भर हम यूँ  ही करवटें बदलते रहें।

13. तेरी आवाज से शहद सी मिठास बरसते है। 
      शायद इसलिए हर कोई तुमसे दोस्ती के लिए तरसते है।

14.हमसे हुई है क्या खता,
      जो दे रही हो इतनी बड़ी सजा।
      गुस्सा छोड़ दे अब और न सता,
      मान जा और अब अपना नाम बता।

15. तुम कुछ खोकर बहुत कुछ पा सकते हो,
      मैं कुछ पा कर बहुत कुछ खो सकता हूँ। 
      बहुत सोचने के बाद पता चला ऐ दोस्त,
      की न तुम मेरे हो सकते हो, और न मैं तेरा हो सकता हूँ। 
      फिर क्यों इतना लगाव है इतना चाह है,
      जबकि दोनों की मंजिल अलग है दोनों की अलग राह है। 

16.तेरी दोस्ती का असर है या तेरे प्यार का असर है, 
      जो दिल इतना व्याकुल है इतना बेसबर है। 
      तुझमे मैं हूँ मुझमे तू है फिर भी एक अंतर है,
      क्योकि हम दोनों के मन में वहम का घर है। 
      तुम्हे कुछ होने का डर है।
      और मुझे कुछ खोने का डर है। 

17.मैं मजबूर हूँ या तेरी कोई मजबूरी,
      जो अब तक है हममें ये दुरी। 
      न जाने कब होगी हमारी ख्वाहिशें पूरी,
      इंतजार में कहीं रह न जाये हमारी हसरतें अधूरी।

18.न जाने क्यों दूर होते हुए पास आने लगे है,
      न जाने क्यों तुम पर अपना हक़ जताने लगे है। 
      ये दिल की आवाज है या है कोई भ्रम नहीं पता,
      पर न जाने क्यों अच्छा सा एक सपना सजाने लगे है। 

19. ऐ दोस्त तुमने मुझे नहीं जाना है,
      मेरी नियत अच्छी नहीं न जाने कैसे माना है। 
      काश तुम्हें एहसास होता मेरे जज्बातों का,
      तब पता चलता तुम्हें, मेरा इरादा तो रिश्तों के वादे निभाना है। 

20.तेरे साथ कुछ सपने सजाने का मन करता है,
      कुछ खोने का कुछ पाने का मन करता है। 
      मोल लगा नहीं सकता तेरे हुश्न का पर सच तो ये है,
      हर कीमत पर तेरे साथ कुछ पल बिताने का मन करता है।

21.अकसर खामोश रह कर ही सब कुछ सच कहती हो,
      पर हमने तेरे बातों को सच मान लिया।
      अब किस अधिकार से तुमसे बात करूँ,
      जबकि हकीकत क्या है मैंने जान लिया।  

22.अब मुझे और क्या बताना चाहते हो,
      तोड़ कर सारे रिश्ते कौन सा रिश्ता निभाना चाहते हो। 

23.आखिर कब तक करूँगा इंतज़ार। 
      बता दो तुमसे दोस्ती करूँ की प्यार। 

24. मैं तुम्हे प्यार करूँ इस पर न कोई जोर है,
      तुम मुझे प्यार करो इस पर न कोई जोर है। 
      पर नजरे मिला कर एक बार कह तो दो,
      की तेरे दिल में मैं नहीं कोई और है।

25.ये कैसा प्यार है ये कैसा चाह है,
      न मुझे तेरी ख़ुशी की चाह है। 
      न तुम्हें मेरी ख़ुशी की परवाह है,
      लगता है दोनों की मंजिल और दोनों की अलग राह है।

26.तुमने कितना समय लगा दिया मुझे आजमाने में
      हमने भी कितना समय गँवा दिया तुम्हे पाने में। 
      ठीक ही किया की तुमने शर्त लगा दी
      वरना कितना समय बीत जाता तुम्हे मनाने में।  
      तुमसे जीतने की कोशिश में ही सही,
      अब आसानी होगी मेरे लिए तुम्हे भुलाने में।

27.तुमने कितना समय लगा दिया मुझे आजमाने में,
      हमने भी कितना समय गँवा दिया तुम्हे पाने में।
      ठीक ही किया की तुमने भुला दिया था मुझे,
      और मैं भी भूल चला था तुम्हें न पा ने के बहाने में।

28.दूर होकर मेरे बिन कैसे रह जाती हो,
      जुदाई का दर्द कैसे सह जाती हो ।
      कितना चालक हो तुम जो चुप रह कर,
      दिल ए बया आँखों से कह जाती हो ।

29. तुमने मुझे भुला दिया पर अब भी मैं तुम्हे याद करता हूँ,
      तेरी सादगी पर अब भी मरता हूँ ।
      तुझे कैसे यकीन दिलाऊ ए दोस्त,
      दिलो जान से भी ज्यादा तुझसे अब भी मैं प्यार करता हूँ ।

30.अब तो हर पल तेरे कॉल का इंतजार है,
      हर पल तेरी आवाज़ सुनने को दिल बेक़रार है ।
      फिर कैसे भूल जाऊं तुझे,
      जब तुमने ही कहा था मुझे तुमसे प्यार है ।

31. कब तक दूरी बर्दाश्त करू कब तक दिल जुदाई का दर्द सहेगा ।
      मिलने की उम्मीद कम है तब भी मुझे हर पल तेरा इंतजार रहता है,
      मन करता है कह दू तुम्हे मेरे दिल की हसरत
      पर डर लगता है की तुम क्या कहोगी ये दुनिया क्या कहेगा ।

32.कभी कभी तेरा रूठना भी एक अदा बन जाती है ,
      अनजाने में ही सही सबसे अनोखी और सबसे जुदा बन जाती है।
      तुमसे मैं यु ही प्यार नहीं करता,
      मैंने सुना है इसी तरह तो मोहब्बत खुदा बन जाती है ।

33. हर बात मेरी तेरे दिल को लगती है क्या इतना अच्छा मेरा निशाना है,
      मुझसे बात न करने का या ये सिर्फ फ़ोन काटने का बहाना है ।
      मैंने तो यु ही शरारत क्या था अपना समझ कर,
      मुझे क्या पता था कि अब भी तू मेरा नहीं बेगाना है ।

34.तुम पर मुझे विश्वास है अपने आप पर विश्वास कैसे करूँ,
      अकसर निराशा से हुआ है सामने तो किसी को पाने की आस कैसे करूँ।
      हमने कर दिया है इसीलिए सब कुछ तक़दीर के हवाले,
      अब ऊपर वाले ने मेरी तक़दीर ही ऐसी बनाई है तो मैं क्या करूँ।

35.मेरा फ़ोन काट देती हो किसी और के फ़ोन आने पर
      टाल देती हो बात को अक्सर पूछे जाने पर
      मैं जानते हुए भी कुछ नहीं कहता तेरा आशिक जो ठहरा,
      सब कुछ भूल जाता हूँ सिर्फ तेरे एक मुस्कुराने पर

36.तेरी आवाज़ इतनी अच्छी है कि तेरी हर बात प्यारी लगती है
      तेरी अदा भी सारे जहाँ से न्यारी लगती है
      मैं क्या हूँ तेरी नज़र में तुम जानो
      पर मेरी नजर में तू तो जान हमारी लगती है 

37.अब तो दे दो मेरे हाथों में तेरा हाथ की प्यार का इकरार करूँ
      अब तो आ जाओ मेरे बाँहों मे तुझे जी भर कर प्यार करूँ

38.तेरे साथ कुछ सपने सजाने का मन करता है,
      कुछ खोने का कुछ पाने का मन करता है। 
      कभी हो नहीं सकता ये शायद,
      फिर भी तेरे साथ कुछ पल बिताने का मन करता है।

39.मैंने रख दिया अपना दिल तेरे हाथों में निकाल कर,
      और तुमने साबित कर दिया मेरा नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल कर ।
      की अब तक तू भूल नहीं पाई है मुझे,
      और अब तक तुमने भी रखा है अपना दिल संभाल कर।

 40. जवानी में अकसर सब ही प्यार के सुहाने गीत गाते है,
      जब दिल टूटता है तो अकसर अपने आपको तन्हा ही पाते है। 
      और भूलने की कोशिश में अकसर सदियाँ बीत जाते है,
      वो लैला बन जाती है तो प्यार के चक्कर में अकसर मजनू पिट जाते है। 

41.ठीक ही किया तुमने जो हमसे रिश्ता तोड़ लिया,
      ठीक ही किया तुमने जो हमसे मुँह मोड़ लिया। 
      वरना पता नहीं कब तेरे साथ रहने की कसमे खा लेता,
      ठीक ही किया तुमने जो हमें तनहा छोड़ दिया।

42.छोड़ दो दामन मेरा मैं कोई ख़ास नहीं,
      झूठ फरेब से है वास्ता मेरा मैं कोई विश्वास नहीं। 
      मुझे अपना बनाने की कोशिश न कर ऐ दोस्त,
     खुशबू बन महका जाऊंगा जीवन को पर मिलने कोई आस नहीं। 

43.न जाने आज क्यों है मेरा दिल इतना बेक़रार। 
     न जाने आज क्यों देख रहा हूँ मोबाइल को बार बार। 
     न जाने आज क्यों थम सा गया है समय।
     न जाने आज क्यों कर रहा हूँ मैं उनके कॉल का इंतजार। 

44.तुम्हे भूलने की कोशिश में हर वक्त तुम ही तुम याद आने लगे।
     मन को बहुत सम्भाला हमने पर कमबख्त आँखे आंसू बहने लगे।
     दोस्तों ने कई बार पूछा - क्या हुआ ?
    सच कह न पाये हम उनसे और हर वक्त उनसे नज़ारे चुराने लगे। 

45. तुम्हे भूलने की कोशिश में हर वक्त तुम याद आने लगे।
      हर पल तुम्हें पाने के ही सपने सजाने लगे।
      तुमसे जुदा होकर मैं तो कब का मर गया होता,
      वो तो तेरा प्यार था मुझे जिन्दा रखने के जो लिए मेरे दिल को धड़कने लगे।

46.तुम्हे भूलने की कोशिश में हर वक्त तुम ही तुम याद आये।
     अब तो आलम ये है कि तेरे सिवा एक पल भी रहा न जाये।
     अजीब सी बेचैनी है अजीब सा हाल है जो किसी को कहा न जाये।
     आकर अब तो गले लगा ले मुझे जुदाई का दर्द अब तो मुझसे सहा न जाये। 

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गोकुल कुमार पटेल

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