Tuesday, 6 December 2011

आज कल की बात


आज कल की बात
कल ने कल की, की पहचान,
कल ने कल को दिया निशान l
कल फिर कल से क्यों है अनजान,
कल क्या कल से है बलवान l
कल ने आज का किया सम्मान,
आज ने कल को दिया बरदान l
कल ही आज है आज ही कल,
आज को फिर कल करता है क्यों बेदखल l
आज कल की परछाई है,
आज ही ने कल को बनाई है l
आज है कल की जान, जान है तो जहान,
कल से आज, आज से कल होता है महानl
कल कल की साज आज,
बनाये जो जागरूक समाज l


(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक  बन सकती है, 
आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l )
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