Wednesday, 22 March 2017

वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।
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खेलने के लिए सुबह से ही जो बुलाया करते थे,
नाम को छोडकर जो कई उपनामों से चिढाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

मिल कर एक साथ जो स्कूल जाया करते थे,
बैठ कर एक साथ, बाँटकर जो खाना खाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

टेढी मेढी लकीरों से मेरा चित्र जो बनाया करते थे,
छिपाकर पेन,पेंसिल, पुस्तक जो मुझे सताया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

छिपकर किसी के भी पीछे जो मुझे डराया करते थे,
डरने पर रात में घर तक जो छोडने आया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

कंधों पर उठाकर जो पेडों पर चढा़या करते थे,
टहनियों पर बिठा कर जो झुला झुलाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

हाथ पकड़ कर जो कीचड़ पर चलाया करते थे,
गुलाल बनाकर जो धुल उडाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

छोटी-छोटी बातों से नाराज़ हो जाया करते थे,
और एक मुस्कान से जो मान भी जाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

नाराज हो जाता था और मैं जब कभी,
मिलकर सब मुझे मनाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

मेरी सही गलत आदतों को जो बताया करते थे,
कभी-कभी मेरी गलतियों को भी जो छिपाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

मम्मी पापा के डाँट से जो मुझे बचाया करते थे,
दुख में गले लगा कर जो अपनापन जताया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

उल्टी-पुल्टी चुटकुले जो सुनाया करते थे,
अजीब-अजीब हरकतों से जो हँसाया करते थे,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

चुपके से दबे पाँव जो पीछे से आ जाया करते थे,
जिनके याद में रह रहकर अब भी पीछे पलट जाया करता हूँ,
वो दोस्त मुझे अब बहुत याद आते है।

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गोकुल कुमार पटेल


(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है, आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में ।)
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