Friday, 21 August 2015

शिष्टाचार के नियम - I

शिष्टाचार के नियम - I

हम सभी ही जानते है की मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर सदाचार और शालीनता को अपनाते हुए विकास करता है इसकी यह गुण ही मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग कर बुद्धिमता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाती है। मनुष्य इस गुण को देखकर और सुनकर अपनाता है और परस्पर आदान प्रदान से इसका विस्तार होता है लेकिन किन्ही कारणवश कुछ लोगों तक यह पहुँच नहीं पाता और वे शिष्टाचार के नियमों से अनभिज्ञ रहते है और अशिष्ट या असभय व्यवहार करने लगते है। लोगों के इसी दोष को दूर करने के आशय से कुछ सुझाव दिए जा रहें है जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपना सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास कर समाज में सम्मान व प्रतिष्ठा प्राप्त  कर सकता है। 

खानपान
1.   खाना खाने के पहले एक या दो गिलास पानी पी सकते है, बशर्तें खाना खाने और पानी पीने के बीच का अंतराल कम से कम आधा घंटा होना चाहिए।
2.    खाना खाने से पहले मुँह, हाथ व पैर अच्छी तरह से धो ले तत्पश्चात खाना खाएं।
3.    नाख़ून को भी हमेशा समयानुसार काटते रहना चाहियें व खाने के पहले भी नाख़ून को अच्छी तरह से धो लेना चाहियें।
4.    खाना खाने से पहले अपने इष्ट देव का स्मरण व प्रार्थना स्वरुप सम्बंधित मंत्र का जप अवश्य करें।    
5.    खाना कभी भी जल्दबाजी में न खाते हुए छोटी छोटी निवाला लेकर कम से कम तीस या पैंतीस बार चबाकर खाना खाना चाहियें।
6.    खाना खाते समय मुँह खोलकर जोर जोर से चबाने  की आवाज निकाले बिना शालीनता पूर्वक मुँह बंद कर के खाना चबाते हुए खाना चाहिए।
7.    खाना टी. वी. देखते हुए, पढ़ते हुए या बातचीत करते हुए न करके एकाग्रचित्त होकर खाना चाहिए।
8.    खाने में से अरुचि कर व अनिच्छित वस्तुएं जैसे - छिलके, बीज, पत्तें आदि को टेबल में न डाल कर थाली के किनारे ही रखना चाहिए या फिर अतिरिक्त पात्र का उपयोग करना चाहियें।
9.    जूठे हाथों से खाना नहीं निकालना चाहियें न ही दूसरे थाली या बर्तनों को छूना चाहियें और न ही जूठे हाथों से गिलास उठाकर पानी पीना चाहियें।
10. चावल और सब्जी को निकालने के लिए अलग-अलग चम्मच का उपयोग करें या फिर चावल निकालने के बाद चम्मच को अच्छी तरह साफ करें तब सब्जी निकालें। 
11. खाना खाने के कम से कम आधा घंटे के बाद पानी पीना चाहिए, जहाँ तक सम्भव हो खाना खाने के बीच में भी पानी नहीं पीना चाहियें।
12. खाना खाने के बाद हाथ व मुँह को अच्छी तरह से धोना चाहिए।
13. खाना पूर्ण करने के बाद ईश्वर के प्रति धन्यवाद् व्यक्त अवश्य करें।   
14. बाहर का खाना, डिब्बा बंद और जंक फूड जैसे खानों से बचना चाहियें।   
15. फल का सेवन खाना खाने के एक घंटे पहले या एक घंटा बाद में ही करना चाहियें।
16. स्वस्थ शरीर के लिए सुबह का नाश्ता भारी, दोपहर का खाना सामान्य व शाम का खाना हल्का, कम व सुपाच्य करना चाहियें।
17. रात का खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले कर लेना चाहियें।
18. खाना खाने के बाद कम से कम सौ मीटर तक धीरे-धीरे चहल-कदमी अवश्य करें।
19. खाना हमेशा गरम व ताजा खाना चाहियें ठंडी खाना खाने से बचना चाहियें।
20. फलों व सब्जियों को हमेशा धोकर ही खाना या उपयोग में लाना चाहियें।
21. फ्रिज में रखें खाद्य सामग्री को खाने से पहले कुछ देर के लिए बाहर निकाल कर रखें फिर खाएं व उपयोग में लाएं।
22. बाजार में बिकने वाले तरह तरह के ठंडी पेय पदार्थ को पीने के अपेक्षा जलजीरा, गन्ना रस व नींबू पानी पीना स्वास्थ्य के अधिक लाभदायक है।
23. नहाने के कुछ समय पश्चात खाना खा सकते है, लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी न नहाएं।
24. मसालेदार व तैलीय खाना खाने से हमेशा बचना चाहियें।
25. मौसमी फल व सब्जियों का सेवन अधिकाधिक मात्रा में अवश्य ही करना चाहियें।
26. पानी कभी भी खड़े होकर व गटागट  नहीं पीना चाहियें बल्कि बैठकर थोड़ा-थोड़ा करके चबाते हुए पानी पीना चाहियें।
27. खाना खाने का स्थान या मेज़ (टेबल) को साफ सुथरा रखना चाहिए, दूसरी पाली में खिलाने या खाने से पहले उस स्थान या मेज़ (टेबल) की सफाई अवश्य कर लें तत्पश्चात खाना खिलाएं या खाएं। 

      क्रमशः...............................      

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          गोकुल कुमार पटेल

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Saturday, 1 August 2015

ध्यान

ध्यान


परिवर्तन का है, एक विकल्प ।
कर ले तू, अपना कायाकल्प ।।
तन को साध, ध्यान कर ।
मन को साध, ध्यान कर ।।
सबसे पहले, बिंदु बना ।
आभा जिसके, हो घना ।।
त्राटक कर, बैठ सीधा ।
बीच में न आये, कोई दुविधा ।।
भूलकर, चहुँ दीवारों को ।
शून्य कर, विचारों को ।।
केंद्रित हो, केंद्र में खो जा ।
ध्यान निंद्रा में, तू सो जा ।।
ऐसा तू बार-बार कर ।
तन को साध, ध्यान कर ।।
मन को साध, ध्यान कर ।।।
तब होगी, ज्ञान की वृद्धि ।
तब मिलेगी, अदभूत सिद्धि ।।
चेतना का नवीन, तब संचार होगा ।
पवित्र मन में, तब न कोई विकार होगा ।।
हर प्रश्नों का, तब समाधान मिलेगा ।
अमरत्व का, तब वरदान मिलेगा ।।
वाणी तेरी संयम होगी ।
मन तेरा संयम होगा ।।
भविष्य को तू, जानकर ।
तन को साध, ध्यान कर ।।
मन को साध, ध्यान कर ।।।
भय दूर, तब भागेगा ।
क्रोध दूर, तब भागेगा ।।
मोह माया, सब दूर होंगें ।
काम वासना भी, न जागेगा ।।
तब मिलेगी, शस्त्र अभेद ।
जातीयता का, न रहेगा भेद ।।
धर्म भी बीच में, न आयेगा ।
कर्म तुझे, महान बनायेगा ।।
मन को तू, सशक्त कर ।
मार्ग तू, प्रशस्त कर ।।
लक्ष्य को, तू जानकर ।
तन को साध, ध्यान कर ।।
मन को साध, ध्यान कर ।।।

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“ध्यान लगाने के लिए इन चित्रों में से किसी एक चित्र को कम से कम एक फ़ीट गुणा एक फ़ीट के कागज़ में छाप कर, आँखों के समांतर तीन फ़ीट की दुरी में रखकर अपलक एकटक देखते रहना है, यह अविधि एक मिनट से लेकर धीरे -धीरे एक घंटे तक बढ़ाना है। इसे ही त्राटक कहा जाता है।“ 

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गोकुल कुमार पटेल

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