Thursday, 27 February 2014

प्रमोशन व एंक्रीमेंट दिलाने का एक आसान सा टोटका

प्रमोशन व एंक्रीमेंट दिलाने का एक आसान सा टोटका
 (१००% गारंटी के साथ)

दोस्तों! वर्षो से मैं एक तरीके पर अनूठा प्रयोग कर रहा था, उन तरीकों को प्रत्यक्ष रूप में कई लोगों को बताया जिसको अपना कर वे लाभावंतित हुए।  इस प्रकार से वह तरीका १००% सफल रहा।  उसके बाद ही मैंने जन कल्याण के लिए यह गोपनीय रहस्य आप लोगों को बता रहा हूँ , जिससे आप सब भी उन तरीको पर अमल कर लाभ प्राप्त कर सकें। यह एक दिवसीय प्रयोग है इसे किसी भी दिन या रात किसी भी  शुभ नक्षत्र में किसी भी समय एकांत में कर सकते है।  वस्त्र, आसन, दिशा का कोई प्रतिबन्ध नहीं है।  यह एक सात्विक साधना और तामसिक साधना का मिलाजुला रूप है।  इसलिए साधना काल के दौरान कुछ डरावना प्रतीत हो सकता है।  जिसको आप अपने साहस और धैर्य के साथ करें तो निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी , जिसके लिए आपको पहले से ही अपने आप को मानसिक तौर पर तैयार होना पड़ेगा तत्पश्चात ही यह प्रयोग करें।  जब कभी आप इसके लिए तैयार हो तब एकांत देखकर इष्टदेव के कार्यालय में जाइये और  अंदर  से कुण्डी लगा लीजिये।  तब आपको कुछ डर का आभास हो सकता है और जैसा की मैंने पहले से ही बता दिया है कि यह सात्विक और तामसिक साधना का मिलाजुला रूप है इसलिए अपने व्यवहार और चहरे के भावों में भी क्रोध व शांति दोनों भावों को लाते हुए स्थिति को संभाल कर उन्हें अपने कुर्सी पर बैठे रहने के लिए विवश कर सकते है।  उसके बाद मोबाईल को विडियो मोड़ पर चालू कर ले व उसे उपयुक्त स्थान पर जहाँ से पूरा प्रयोग अच्छी तरह से रिकार्ड हो सकें रख लें।  तत्पश्चात पहले से एकत्र किये हुए सामान को बारी-बारी से निकाल कर यह क्रिया कीजिये।  सबसे पहले सिंदूर से तिलक लगाएं, फूल की माला पहनाएं (कोई भी फूल की माला चलेगा जो आसानी से उपलब्ध हो सकें) एक नारियल को फोड़कर उसका जल इष्टदेव के चरणों में अर्पित करें, तत्पश्चात वातावरण को शुद्ध करने के लिए अगरबत्ती जला ले और संक्षिप्त आरती करें :-         

 “आरती”
हे दया के सागर हे पालनहारी ।
पाप किया है तूने वो अत्याचारी ।।
लाज नहीं आती वो बेशर्मी ।
काम करके क्या हो गया मैं कुकर्मी ।।
मैं तो हूँ मुरख पर तू तो है दाता ।
बंद किया है क्यों तूने मेरा खाता ।।
समझ नहीं पाया मैं तेरी माया ।
तेरी चरण में जो शीश न झुकाया ।।
गलतियों कि सजा मैंने खूब है पाया ।
पर अब देख मैं तेरी शरण में आया ।।
खाली झोली अब तो भर दे ।
मुझको प्रमोशन व एंक्रीमेंट का वर दे ।।
मुझको प्रमोशन व एंक्रीमेंट का वर दे ।।
मुझको प्रमोशन व एंक्रीमेंट का वर दे ।।

तत्पश्चात क्षमा याचना करें -
“हे देवता हे पालनहारी मैं मूरख आपकी महानता को समझ नहीं पाया, हे दया के सागर मेरी गलतियों को मेरी भूल समझकर मुझे क्षमा करें और आपके आशर्वाद से मेरी जीवन नैय्या पार कर मुझे प्रमोशन व एंक्रीमेंट प्रदान करने की महान कृपा करें।“ 

उपरोक्त क्रिया को करने के बाद बचा हुआ सामान समेटे व बिना पीछे पलटे बाहर आ जाये और अपने दैनिक क्रिया में लगे रहें। आपको इसका फल अवश्य ही प्राप्त होगा। 

ध्यान रहें:-
उपरोक्त प्रयोग का क्रियात्मक व लयात्मक ज्ञान किसी अच्छे गुरु से ग्रहण अवश्य कर ले, हो सकें तो गुरु दीक्षा ले लें इसके अभाव में क्रिया का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। बार -बार यह क्रिया दोहराने कि जरुरत नहीं है जब भी जरुरत पड़े वह विडियो क्लिप ही काम आएगी। किसी कारण वश आपकी व आपके बॉस में से किसी का भी तबादला होता है तो यह क्रिया पुनः करने पड़ेंगे। यह साधना सातविक और तामसिक साधना का मिलाजुला रूप होने के कारण स्थिति के अनुरूप अपने व्यवहार एवं चहरे पर क्रोध व शांति का भाव कई बार लाना पड़ सकता है जो स्थिति पर निर्भर करता है इसलिए साधक स्वविवेक पूर्वक यह कार्य करें।


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गोकुल कुमार पटेल
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