Monday, 15 July 2013

अनभिज्ञ

      अनभिज्ञ
















कुछ खास तो है जीवन,
जिसके लिए पैदा हुए है l
कर गुजरने की चाह भी है दिल में,
मकसद क्या है?
भले ही पता नहीं l
कुछ तो है?
जिसकी तलाश है,
ताकती है जिसे आँखें और मन l
बना है जिसके लिए जीवन,
क्या है वो?
भले ही पता नहीं l
कुछ सवाल तो है?
जहन में,
टीस से जो विचलित है l 
कोशिश करते रहते है,
जबाब ढुंढने की,
आश भी है जबाब मिलने की l
क्या सवाल है?
भले ही पता नहीं l
चलते जा रहे है, चलते जा रहे है,
रास्ते बन रहें है पगडण्डी सी l
भटक न जाये,
रास्तों में उलझ कर,
भूलते नहीं है लक्ष्य को इसीलिए l
मंजिल कहाँ है?
भले ही पता नहीं l
लड़ाई तो है?
तैयार हो रहे है जिसके लिए l
विचार दृढ़ है जज्बा बढ़ रहे है,
बार-बार चढ़ रहा है ,
उतर रहा है पारा l
किससे है जंग?
भले ही पता नहीं l

(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है, आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l)

गोकुल कुमार पटेल