Wednesday, 3 April 2013

राम भक्ति


राम भक्ति


ज्ञानियों के मन को ,राम नाम भाया है l
सबके जुबान पर भी, राम नाम आया है l l
एक राम नाम सच्चा जग में, बाकि सब मोह माया है l
निराकार, निराधार वो तो, कण कण में समाया है l l
ज्ञानियों के मन को ………………………………….……… कण कण में समाया है l l

मतकर घमंड इस तन पर, मिटटी का बना ये काया है l
प्रभु ने इसको कभी एक पल में बनाया, तो कभी एक पल में मिटाया है l l
ज्ञानियों के मन को ………………………………….……… कण कण में समाया है l l

झूटी शान के मोह में फंसकर, तूने कितना धन कमाया है l
यहाँ से लेकर वहां तक की, धरती को अपना बताया है l l
तुझे जरुरत है पांच फिट जमीं की ही, ज्ञान कर ऐ मुरख ये सब अपना नहीं पराया है l
ज्ञानियों के मन को ………………………………….……… कण कण में समाया है l l

सब कुछ तो मिल जाता है,यहाँ मोलने में l
कम ही होता है, अकसर वो तौलने में l l
एक नाम को तौल कर देखो, नित नित बढ़ता जाता है,
अब तक सबने सब को दिया, फिर भी दाम किसी ने नहीं लगाया है l
ज्ञानियों के मन को ………………………………….……… कण कण में समाया है l l

दुखो से लड़कर जीने का आस वो देता है l
निर्बुद्धि को भी ज्ञान का प्रकाश वो देता है l l
कभी घबराना नहीं, तेरे सर पर राम का साया है l
ज्ञानियों के मन को ………………………………….……… कण कण में समाया है l l


(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है, आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l)

गोकुल कुमार पटेल