Thursday, 7 February 2013

सरस्वती वंदना


सरस्वती वंदना


हे ज्ञान की देवी , अज्ञान से हमको तार दे
ख़त्म हो न ऐसा, ज्ञान का हमें भंडार दे
हे स्वरों की देवी, हे हंसवाहिनी,
हे करुणामयी, हे वाणी दायिनी 
हे श्वेत वस्त्रधारिणी , हे वीणा वादिनी,
गूंज उठे चारों दिशाओं में जय तेरी,
ऐसी वीणा की झंकार दे ।।
हे ज्ञान की देवी , अज्ञान से हमको तार दे 
ख़त्म हो न ऐसा, ज्ञान का हमें भंडार दे ।।
हे शीतलता की देवी , हे ज्ञान नंदिनी ,
हे शांति की देवी , हे अशांति खंडिनी 
हे माँ शारदे , तू है हमारी बंदिनी,
अज्ञान के अन्धकार को मिटा सके,
रोशनी ऐसी अपार दे ।।
हे ज्ञान की देवी , अज्ञान से हमको तार दे 
ख़त्म हो न ऐसा, ज्ञान का हमें भंडार दे 



(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है, आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l)

गोकुल कुमार पटेल
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