Friday, 27 January 2012

न्यायमूर्ति


 न्यायमूर्ति

मुख से कुछ नहीं बोलती है,
फैसलों को सिर्फ सबूतों से तौलती है l
आँखों में बंधी पट्टी है,
उस पर लगी मिट्टी है l
पट्टी को नहीं उतारती है,
मिट्टी को नहीं झाड़ती है l
न्यायी को न्याय देकर,
अन्यायी को सदा पछाड़ती है l
उसके आगे हाथ सबकी जुड़ती है,
वो इंसाफ की देवी, और न्याय की मूर्ति है l


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रात


रात

गाँठ बांध ले जो मैं कहता,
प्रेरणा वाली ये बात है l
पल भर में जितनी खुशियाँ,
लुट सको लुट लो,
क्योकि दुनियां से जीवन का,
पल भर का साथ है l
सुख लगेगा तुम्हे,
दिन का दमकता सूरज,
पर दुःख तो अँधेरी रात है l
फूँक फूँक कर,
रखना पड़ेगा पांव तुझे,
तेरे हर कदम पर,
दुश्मन लगाये घात है l
काम, क्रोध, लोभ, मोह,
ये सब है सांसारिक माया,
जिसका कोई रंग न रूप,
वेश न भूषा,
न कोई जात है l
संभल जा अब तो, 
बचा ले डूबने से,
संभलना तेरे ही हाथ है l
बच गया इनसे तो,
निश्वार्थ प्यार की रौशनी फैलेगा,
नहीं तो दिन भी तेरे लिए,
                        अमावस्या की काली रात है l




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Monday, 23 January 2012

गोकुल की नगरी


गोकुल की नगरी

जहाँ ग्वाल बाल की टोलियाँ,
जहाँ छलकती है गोपियों की गगरी,
वो है गोकुल की नगरी l
जहाँ पवित्र नदियाँ जमुना की,
जहाँ ठंडी ठंडी कदम की छांव,
वो है गोकुल का गांव l
जहाँ दूध की धारा बहती है,
जहाँ मिलता है आम, अमरूद और जाम,
वो है गोकुल का ग्राम l
जहाँ ऊँचे ऊँचे पर्वत है,
जहाँ पतली पतली सी है डगर,
वो है गोकुल का नगर l
जहाँ परम के दीवाने सभी,
जहाँ रंग बिरंगे उनके भेष,
वो है गोकुल का देश l

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Sunday, 22 January 2012

चांदनी


चांदनी

चाँद ने जब अपनी चांदनी फैलाई l
सुबह समझकर उल्लू बोला,
रातरानी भी भूल से खिल आई l
झिंगरा अब मधुर तान सुनाती,
चाँद शरमाकर तब बादलों में छिप जाती l
लुका छुपी का ये खेल निराले,
आँखे फाड़े देख रहे थे तारे l
निकल पड़े जानवर सभी अपने काम से,
सो रहा था पर इन्सान आराम से l


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Friday, 20 January 2012

निशा का प्रेम


निशा का प्रेम

एक दिन जब मैंने,
जलाई प्यार से ज्योति l
देखा छिपकर निशा को रोती l
मैंने उससे पूछा?
निशा तू क्यों है रोती l
सिसक सिसककर निशा बोली,
मेरी प्रिय सखी, सहेली ज्योति l
दोनों ही खेलने आते,
लेकर हाथों में हाथ l
समय बिताते दोनों साथ ही साथ l
सुख दुःख में भी,
हमेशा साथ रहते l
सब हमको दो बहने ही कहते l
सबके दुखो को वो हरती,
जीवन में खुशियों को भरती l
पर जबसे तुमने ज्योति जलाई है l
मेरे मन में एक डर सी समाई है l
आंधी और तूफां से,
कही ज्योति बुझ न जायेगी l
हर यादें तब,
मुझे हर पल तडपायेगी l
मैंने जब हाथ फेरा,
उसके बालो पर l
देखा निरंतर लुढ़क रहे थे,
आश्रू धारा उसके गालो पर l
आंसुओं को पोछकर,
कहा थोडा सोचकर l
जब कभी ज्योति बुझ जायेगी l
तन्हाई तडपायेगी l
तेरे मन की डोर से बंध,
फिर आऊंगा l
बिराने में फिर से मैं,
प्यार की ज्योति जलाऊंगा l


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ये है आज के छात्र


ये है आज के छात्र

    ये है आज के छात्र, ये है आज के छात्र l
               पढ़ना तो है नहीं सिर्फ दिखावे के मात्र ll

जब भी ये पहुचे स्कुल l
नियम अनुशासन गए भूल ll

    बालो को पहले ये संवारते l
    फिर पान और गुटका चबाते ll

रंग बिरंगे कपडे पहनकर स्कुल आते l
यूनिफार्म का वो मजाक उड़ाते ll

    अकसर वो फ़िल्मी गीत है गाते l
    रास्ट्रीय गीत गाने में शरमाते ll

बैठ कुर्सी पर गप लड़ाते l
तांकाझांकी करके लड़कियों को चिढाते ll

     सप्ताह में दो दिन स्कुल आते l
     होमवर्क भी न घर से करके लाते ll

शिक्षक को तरह तरह के बहाने सुनाते l
जब कभी समय पर शिक्षक नहीं आते ll

    जमकर ये शोर मचाते l
    खेलकूद में समय बिताते अपने को सदाचारी बताते ll

छात्रा शिक्षक को, छात्र शिक्षिका को पटाकर,
भेदभाव और असमानता मिटाते,
                                                 तभी तो ये आज के छात्र कहलाते l


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Wednesday, 18 January 2012

प्रदुषण


                                    प्रदुषण

ये प्रदुषण के,
बिषैले नाग,
फैले हुए है वातावरण में l

        करोड़ों लोग जी रहे है,
        मर रहे है,
                                            इसी प्रदुषण भरे पर्यावरण में l

इस बिषैले जहर से, 
दुनियां को बचाना है,
तो आज से इन्सान को अपना फर्ज निभाना है l

        है अगर शिक्षित इन्सान, 
        तो आज से ही पेड़ लगाने की ठान,
        पेड़ पौधों की रक्षा कर, इसको दे मान l

प्रदुषण से बचने का,  
यही है सरल तरीका,
और यही है प्रदुषण का समाधान l

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Monday, 16 January 2012

कली

कली

ऐ कली ठहर जरा, 
अभी सबेरा हुआ नहीं,
आंसमा की चादर ओढ़े सूरज सो रहा है,
भोर गीत गाकर,
किसी ने अब तक उसे जगाया नहीं l 
ऐ कली …………………………..जगाया नहीं ll
अँधेरा भी जग रहा है,
चाँद तारे भी जग रहे है,
झींगुर भी सिटी बजाकर,
रखवाली तेरी कर रहा है,
जग रहा है उल्लू अभी, 
जम्हाई उसे भी आया नहीं l
ऐ कली …………………………..जगाया नहीं ll
प्रहर करवट बदल रहा है, 
ब्रहम मुहूर्त अभी आया नहीं,
पक्षियों ने अभी चहचहया नहीं, 
पंख अपना फडफडया नहीं,
खिल गया अगर तू अभी, 
पंखुड़ी तेरे झुलस जायेगें
शीतल, मधुर, ठंडी पवन,
पूरब ने अभी बहाया नहीं l
ऐ कली …………………………..जगाया नहीं ll
बिखर जायेगें फिर खुशबू तेरे,
तितली भी पास नहीं आयेगा, 
भौंरा भी मौन हो जायेगा,
मधुर गीत फिर कोई गुनगुनायेगा नहीं,
ऐ कली …………………………..जगाया नहीं ll


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Sunday, 15 January 2012

तिरंगा ये हमारा


तिरंगा ये हमारा










            सबसे है प्यारा प्यारा, तिरंगा ये हमारा l 
तिरंगा ये हमारा, सबसे है प्यारा प्यारा l
ऊँचा है इसका नाम, ऊँची है इसकी शान,
नई उमंगो वाला, तीन रंगों वाला l
सबसे है प्यारा प्यारा, तिरंगा ये हमारा l 
तिरंगा ये हमारा, सबसे है प्यारा प्यारा l
विदेशों की हुकूमत, नहीं है हमको गवारां,
शहीदों की याद दिलाता, केसरिया रंग हमारा l
सबसे है प्यारा प्यारा, तिरंगा ये हमारा l 
तिरंगा ये हमारा, सबसे है प्यारा प्यारा l
कोई गैर नहीं यहाँ, सब है भाई हमारे,
शांति का सन्देश फैलाता, सफ़ेद रंग ये हमारा
सबसे है प्यारा प्यारा, तिरंगा ये हमारा l 
तिरंगा ये हमारा, सबसे है प्यारा प्यारा l
सभी तरफ पेड़ लगाकर, धरती का श्रृंगार करो
हरियाली की याद दिलाता, हरा रंग है सबसे न्यारा
सबसे है प्यारा प्यारा, तिरंगा ये हमारा l 
तिरंगा ये हमारा, सबसे है प्यारा प्यारा l
बीच में जो चक्र होता, चौबीस कड़ियों वाला, नीले रंगों वाला,
दिन रात की याद दिलाता, प्रगति चक्र ये हमारा,
सबसे है प्यारा प्यारा, तिरंगा ये हमारा l 

                        तिरंगा ये हमारा, सबसे है प्यारा प्यारा l 



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सरहद के वीर जवान


 सरहद के वीर जवान


सरहद के वीर जवान, तुम हो एक अनोखी शान,
तुमसे है भारत प्यारा, तुमसे है तिरंगा महान l
छोड़कर घर परिवारों को, रहे तुम पहाड़ो पर,
बज्र बनकर गिरे भी तुम, सैकड़ों और हजारों पर l
करके तन, मन, धन और जीवन अर्पण,
बन गए देश के भविष्य का दर्पण l
दुश्मनों ने जब अचानक, सरहद पर आक्रमण किया,
तुमने ही आगे बढकर, उनका मुहँ तोड़ जबाब दिया l
लगी तन पर गोलियाँ, फिर भी एक ने बीस बीस को मारा,
मरते समय लव पर भी था, तिरंगा है सबसे प्यारा l
तुम देश को विजय कर, मर कर हो गए अमर,
घर पर, पर क्या हुआ, जब पहुची तुम्हारे मरने की खबर l
दुःख से गिर पड़ी बूढी माँ, लाठी भी गई हाथों से छुट,
हिम्मत करके फिर भी बोली, गर्व है तुम पर मेरे सपूत l
बाप का तो मत पूछो हाल, पत्थर रख लिया था सीने में,
रो रोकर कह रहा था, अब क्या रखा है जीने में l
खबर सुनी जब बहना ने, जोर जोर से करने लगी क्रंदन,
याद आने लगा वो, पावन पर्व रक्षा बंधन l
बीबी को जब पहुची खबर, खबर ने किया ऐसा असर,
पागलों की भांति, रो रोकर हँसने लगी,
बढ़ गया दुःख इतना की, सांसे भी सीने में फ़सने लगी l
याद करके बीती बातो को, खो बैठती अपना होश,
एक पल के लिए जगती, फिर हो जाती बेहोश l
ऐसा है इनका दास्तान, जिन्होंने रखा देश का मान,
आओं मिलकर हम भी करे, हाथ जोड़ इनका सम्मान l 
सरहद के वीर जवान, तुम हो एक अनोखी शान,
तुमसे है भारत प्यारा, तुमसे है तिरंगा महान l

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