Saturday, 18 August 2012

सपना है या अनुभूति - 4


सपना है या अनुभूति - 4


गॉव में चारों तरफ बड़ी चहल पहल लग रही थी सभी लोग इधर से उधर भागे जा रहे थे मैंने एक लडके को रोक कर पूछा- क्या हुआ ? कहाँ भागे जा रहे है सब? लडके ने तत्परता से भागते हुए कहा- गॉव के बाहर जो पीपल का पेड़ है न ? वहां पर एक साधु बाबा आये हुए है बहुत पहुँचे हुए है देखते ही सब कुछ बता देते है l

जब मैंने ये सुना तो मन में कई तरह की जिज्ञासाएं उठने लगी l  और उन जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए मैं भी बाबा से मिलने पहुँच गया l  देखा चारों तरफ बहुत भीड़ है लोगों ने पुरे पीपल के पेड़ को घेर रखा है l मैं भी उसी भीड़ में शामिल हो गया और भीड़ को चीरते हुए जब पेड़ के पास पहुचां तो देखा - सफ़ेद बाल, सफ़ेद दाढ़ी युक्त सवांले से एक वयो बृद्ध छोटी से गेरुआ रंग की धोती और छोटा सा गमछा ओढ़े हुए बैठे है l  सभी उनको नतमस्तक होकर प्रणाम कर रहे थे l  उनके चहरे में गजब का आकर्षण था जिसने मुझे नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया l

मैंने आदर पूर्वक उन्हें प्रणाम किया तो बाबा मुस्कुराते हुए बोले - खुश रहो वत्स ! बताओं मंदिर का काम कैसा चल रहा है l मेरी नजर अगल बगल झांकने लगी की ये किसी और को तो नहीं बोल रहे है पर मेरे पास कोई नहीं थे मैंने असमंजता जताते हुए कहा - मुझे कह रहे है?

हाँ वत्स - उनके चेहरे में वही मुस्कान थी l

पर मैं तो कोई मंदिर नहीं बना रहा हूँ – मैंने उसी असमंजता से जबाब दिया l

अच्छा अच्छा तो फिर मकान बना रहे हो - बाबा ने बात बदलते हुए कहा l

मुझे उनकी बातें उलझा रही थी मैंने उलझन से निकलते हुए बोला - ये क्या? मन में जो आया वो बोले जा रहे है? मैं कोई मकान, मंदिर नहीं बना रहा हूँ?

फिर नींव किसके लिए डाली है - बाबा बोले l

वो - वो तो छोटा सा दीवाल टूट गया था उसके लिए खोदा है पर खोद तो दिया है लेकिन मेरे पास इतने ईट पत्थर नहीं है की वह दीवाल भी उठ सकें और आप मकान की बातें कर रहे है l

नींव तो डाल दी है न अब तो मंदिर बन जायेगा - बाबा ने बातों को दोहराते हुए कहा l

अब उनकी बातें मुझे गुस्सा दिला रही थी मैंने झल्लाते हुए कहा - कितने बार कहू आपसे की मैं कोई मंदिर नहीं बना रहा हूँ, मकान नहीं बना रहा हूँ l आपकी समझ में ये बात क्यो नहीं आ रही है l नींव डाल दिया बोल दिया तो बहाना मिल गया? सोच रहें होंगे की वैसे नहीं तो ऐसे तो फंसा लूँगा? और दान दक्षिणा मिल जायेगा l कुछ नहीं आता है तो बोल दो न की नहीं आता है इस तरह से पाखंड रचकर लोगों को लूटने का धंधा बना लिया है l आप जैसे लोग ही साधू, महात्मा को बदनाम कर रहे है l एक ही साँस में मैंने अपना सारा गुस्सा उन पर उतार दिया और उनको बुरा भला कहते वहां से चला आया l

कुछ ही दूर आया था की रास्ते में मुझे गुरूजी के दर्शन हो गए l मैंने गुरूजी को प्रणाम किया l मेरे चेहरे के भावों समझ गए थे शायद इसलिए आशीर्वाद देते देते मुस्कुराते हुए बोले - क्या हुआ वत्स! किस पर बिगड़ रहे हो?

वो जो पीपल के पेड़ के पास एक संत आये है न उनके ऊपर , अरे काहे का संत? बेवकूफ बना रहे है सबको, हमारे घर के  सामने का छोटा सा दीवाल टूट गया था न? उसको उठाने के लिए नींव खोदा है l कब से जैसे का जैसा पड़ा है देख लिया होगा l उसके लिए मुझे कहता है नींव डाल दिया है, मंदिर बना रहे हो की मकान बना रहे हो?

अब आप ही बताइए - कहाँ पांच फुट का दीवाल, कहाँ मकान और कहाँ मंदिर l उतने छोटे से दीवाल में मकान बनेगा की मंदिर बनेगा? 

गुरूजी मंद मंद मुस्कुराते हुये बोले -  इसमें गुस्सा करने वाली बात कहाँ है वत्स! सही तो कहा उन्होंने?

मेरा भी तो यही सवाल है वत्स! मै भी तुमसे यही पुछने वाला था कि मंदिर बनाओगें की मकान बनाओगें l

उनके बातों को सुनकर मैं अचरज में पड़ गया और मेरे चारों तरफ सन्नाटा हो गया और उस सन्नाटे ने मेरी तनिंद्रा भंग कर दी l मैंने आँखें खोल दी तो पाया की मैं पलंग पर लेटा हुआ हूँ और सचमुच सभी तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा है पर उनकी ये बातें अब भी मेरे कानों में गूंज रही थी की मंदिर बना रहे हो की मकान बना रहे हो?

सुबह मैने सपने मे देखे हुये दिवाल का मुयैना किया किसी भी तरह से वह जगह न तो मकान बनने लायक था न ही मन्दिर बनने लायक ही था फिर बाबा ने ऎसा क्यो कहा? वो बाबा कौन थे? गुरुदेवजी ने भी ऎसा क्यो कहा? वे मुझे किन बातो का एहसास करा रहे थे? मकान व मन्दिर मे क्या अन्तर है? ये सारे सवालो के जबाब मुझे समाज के प्रति अपने कर्तब्यो का बोध कराते है, क्या ये सही है? क्या मै समाज के प्रति अपने कर्तब्यो का भलीभान्ति निर्वाहन कर पाउँगा? क्या मै समाज को एक नई दिशा दे पाउँगा? 

इन्ही प्रेरणाओ को जीवन मे उतारने की एक कोशिश में……………

            गोकुल कुमार पटेल  

(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है, आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l)



DREAM OR SENSATION - 4

Village was looking around all the hustle and bustle of people were running here and there I asked the guy to stop - what happened? Is where are you running? The shy boy promptly said - Village People outside of the tree is not it? There has been a lot of sage has reached the view that everything is just.
When I heard that many of the queries raised in the mind,
And to defuse the queries I got to meet Baba l saw a crowd of people around the trees, laid siege to the entire People.
White hair, white beard, an elderly Swanle containing small orange-colored dhoti and a small sitting wrapped in bandannas. They bow their heads bowed and their faces were all the wonderful things that I was forced to bow their heads.
I humbly bowed to the sage said, smiling - happy Watts! Tell me how is the work of the temple began to look around you to see if they are not talking to anyone else but I have none expressed dilemma said - I are saying is
Yes Watts - his face was the same smile .
But I am not making a temple - I answered the same dilemma.
So the houses are well built - Baba's changing the.
I was confused and out of the things I said was confusing - what is this? Came to mind that they are talking? I have no house, the temple is not?
For whom the foundation is laid - Baba said,
She - she dug for him a small wall was broken
You have to dig, but I've got to get up and eat the stone wall of the house are the things that you.
So do not put the foundation will now become the temple - Baba reiterated the points.
Now the things I was aggravating, Rattling I said - how many times you say I'm not a temple,
  I am not making house, You can not understand why it's. Have laid the foundation said it was the excuse? Will be thinking of the way so that you'll get caught? will give alms and donations.
If something does not speak or do not, The hypocrisy of the arguments people have made the business of rob. People like you saints, are infamous for Mahatma.In the same breath I take your anger on them and abuse them came from the.
Some came away in the way that I have visions of master. I bowed to the Guru, My facial expressions were understood. Maybe give the blessing with a smile and said - what Watts! What are the worse?
People who are not their top of the tree came a saint, a saint oh why? Making a fool of everyone, a small wall in front of our house was broken right? He dug the foundation for taking such a long. l like to have seen tells me it has laid the foundation, the temple are made ​​of the houses are built?
Now you tell me - where five feet of the wall, where many small houses and where the temple. temple wall of the house will be?
Dim-dim priest said while smiling - that's where the anger Watts! Right then did he say?
Watts I also have the same question! I was you, the inquiry, the temple houses Bnaogen Bnaogen.
Listening to the things I had to wonder and silence was all around me, The silence broke my Tnindra.  Opened my eyes when I found I was lying on the bed and indeed all the silence is the silence
These things, he was still buzzing in my ears are the temple of the houses are built?
I had seen in dreams Muyana day to be pointing in any way to the house was worth neither the place nor the Baba temple was worthy of being called so, why? Those who were Baba? It also said Gurudevji Why? What are the things I felt they were? What is the difference between house and temple? I answer all these questions is to make society aware of his obligation, is that right? Of their obligation to society what I'd been handling well? What I'd give the society a new direction? In an attempt to bring these inspirations in life ...............

Gokul Kumar Patel
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