Thursday, 10 May 2012

नन्हा फ़रिश्ता


नन्हा फ़रिश्ता

प्यार का बनाने एक नया रिश्ता,
आया आया एक नन्हा फ़रिश्ता l
साथ अपने वो बहार लाया,
मुठ्ठी में समेटे प्यार लाया l
आँखे है उसके बड़े प्यारे,
चमके जैसे हो चाँद सितारे l
देख देखकर हमको वो तो,
कभी रोता तो कभी है वो हँसता l 
प्यार का बनाने एक नया रिश्ता,
आया आया एक नन्हा फ़रिश्ता ll
पालने में माँ जब उसको सुलाए,
देख देखकर मन अपना बहलाये l
प्यार से जब उसको पापा सहलाये,
फिर भी मुन्ना कह नहीं पाया l
पापा पापा चाकलेट क्यों नहीं लाये,
दादा दादी लेते बलाएँ,
कुछ न जब उनको सूझता l
प्यार का बनाने एक नया रिश्ता,
आया आया एक नन्हा फ़रिश्ता ll
फूलो सा महके है वो तो,
हवा उसकी महक चुराता l
घर आँगन में उसको फैलाता,
मन में नया उमंग जगाता l
झुक जाती शरमाकर फूलों की डाली,
मंद मंद मुस्कुराते जब वो दिखता l
प्यार का बनाने एक नया रिश्ता,
आया आया एक नन्हा फ़रिश्ता ll





(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है, आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l)
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