Friday, 13 April 2012

दिन



दिन

सुबह हुआ सूरज निकला,
सबेरे सबेरे तालाब में फुल खिला l
भौंरें भी गुनगुनाने लगे,
गाने लगे प्यार के तराने l
सूरज की किरणों से धरा हुई सरोबोर,
शुरू करने लगे सब अपना कारोबार l
बजने लगी मंदिर की घंटी,
माँ चिल्लाने लगी उठो, पिंकी बंटी l
सुबह सुबह दरवाजे पर फेंक दिया अखबार,
नहा धोकर हो जाओ तैयार l
करके प्रभु को प्रणाम,
करो शुरू तुम अपना काम l
काम में हो के तुम लीन,
फुर्ती से गुजारो अपना दिन l
दिन को हर पल बर्फ जैसे पिघलना है,
समय की हर कड़ियों को हमें मजबूती से पकड़ना है l
शाम हुई अब तो, सूरज को भी ढलना है ,
चलो घर चले, कल फिर हमें अपना काम करना है l


(इन रचनाओ पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक बन सकती है,
 आप की प्रतिक्रिया के इंतजार में l)

Post a Comment